अल-हिज्र · 17/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَحَفِظْنَاهَا مِن كُلِّ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ ۝١٧
Wa hafiznaahaa min kulli Shaitaanir rajeem
📖 हिंदी अर्थ
और हर शैतान मरदूद की आमद रफत (आने जाने) से उन्हें महफूज़ रखा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَفِظْنَاهَا: हमने उसे (आकाश को) सुरक्षित रखा।
  • شَيْطَانٍ: शैतान, अर्थात् सर्वथा दुष्ट और अवज्ञाकारी प्राणी।
  • رَّجِيمٍ: जो रहमत से मारा-भगाया गया हो, या जिस पर पत्थर फेंके जाते हों (उल्कापिंडों द्वारा भगाया गया)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने आकाश को हर उस शैतान से सुरक्षित रखा है जो उसकी रहमत से मारा-भगाया गया है। यह सुरक्षा इसलिए है ताकि शैतान आकाश की ओर चढ़ने, उसके राज़ जानने, या वहाँ की बातें सुनने की कोशिश न कर सके। जब भी कोई शैतान आकाश की ओर बढ़ने या उसकी सीमा में घुसने का प्रयास करता है, तो उस पर जलते हुए उल्कापिंड (टूटते तारे) फेंके जाते हैं, जो उसे भगा देते हैं। यह अल्लाह की कुदरत और उसकी हिफ़ाज़त का नमूना है कि उसने आकाश को शैतानों की पहुँच से महफ़ूज़ रखा है, ताकि वे वहाँ की ख़बरें न ला सकें और न ही उसके निज़ाम में कोई खलल डाल सकें। यह आयत उस आसमानी किताब (क़ुरआन) की हिफ़ाज़त की तरफ़ इशारा भी करती है, क्योंकि जिस आकाश से वह किताब उतरी है, उसे ही शैतानों से बचाया गया है।

फ़ायदे:

  • इस आयत से मालूम होता है कि अल्लाह तआला अपने निज़ाम की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है, और कोई भी मख़लूक़ उसकी मरज़ी के बग़ैर उसके इंतिज़ाम में दखल नहीं दे सकती।
  • यह हमें सिखाती है कि जिस तरह अल्लाह ने आकाश को शैतानों से बचाया, उसी तरह उसने क़ुरआन को भी हर तरह की तहरीफ़ और मिलावट से महफ़ूज़ रखा है, जो हमारे लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है।
  • यह ईमानवालों के लिए तसल्ली का बाइस है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त में कोई कमी नहीं, और वह अपने बंदों को भी शैतान के वसवसों से बचाने की क़ुदरत रखता है, बशर्ते वे उसकी तरफ़ रुजू करें।
  • यह आयत शैतान की कमज़ोरी और उसकी रुसवाई को बयान करती है कि वह आकाश तक पहुँचने की जुर्रत नहीं कर सकता, इसलिए मुसलमान को उसके धोखों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-हिज्र

15لَقَالُوا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَ
तब भी यहीं कहेगें कि हो न हो हमारी ऑंखें (नज़र बन्दी से) मतवाली कर दी गई हैं या नहीं तो हम लोगों पर जादू किया गया है
16وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِرِينَ
और हम ही ने आसमान में बुर्ज बनाए और देखने वालों के वास्ते उनके (सितारों से) आरास्ता (सजाया) किया
17وَحَفِظْنَاهَا مِن كُلِّ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और हर शैतान मरदूद की आमद रफत (आने जाने) से उन्हें महफूज़ रखा
18إِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُّبِينٌ
मगर जो शैतान चोरी छिपे (वहाँ की किसी बात पर) कान लगाए तो यहाब का दहकता हुआ योला उसके (खदेड़ने को) पीछे पड़ जाता है
19وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَيْءٍ مَّوْزُونٍ
और ज़मीन को (भी अपने मख़लूक़ात के रहने सहने को) हम ही ने फैलाया और इसमें (कील की तरह) पहाड़ो के लंगर डाल दिए और हमने उसमें हर किस्म की मुनासिब चीज़े उगाई
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अनुवाद — अल-हिज्र 17

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Tuesday, August 18, 2026

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