अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَدَدْنَاهَا: हमने उसे फैलाया, विस्तृत किया।
- رَوَاسِيَ: पहाड़, जो धरती को जमाए रखते हैं।
- مَوْزُونٍ: नाप-तौल के साथ, एक निश्चित मात्रा और अनुपात में, अर्थात जो अपनी मात्रा, गुण और परिमाण में संतुलित और निर्धारित हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी कुदरत के नमूने पेश कर रहा है। वह फ़रमाता है कि हमने ही धरती को बिछाया और उसे फैलाकर रहने के काबिल बनाया। यह धरती शुरू में इस तरह नहीं थी कि उस पर इंसान आराम से रह सके, बल्कि हमने ही उसे समतल और विस्तृत किया ताकि लोग उस पर चलें, बसें और अपनी ज़रूरतें पूरी करें।
फिर अल्लाह ने बताया कि हमने इस धरती में पहाड़ों को गाड़ दिया, जैसे खूँटे गाड़े जाते हैं। ये पहाड़ धरती को जमाए रखते हैं ताकि वह अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं। यानी पहाड़ धरती के लिए स्थिरता का ज़रिया हैं।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि हमने ही धरती में हर चीज़ की पैदावार की — हर क़िस्म के पौधे, फल, अनाज और वनस्पतियाँ — लेकिन सब कुछ एक निश्चित मात्रा और अनुपात में। हर चीज़ अपनी एक तयशुदा मात्रा, वज़न, आकार और गुण के साथ पैदा होती है। न कम, न ज़्यादा। यह सब अल्लाह की हिकमत (समझदारी) के मुताबिक़ है, ताकि इंसान और तमाम मख़लूक़ात अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करना: यह आयत हमें सिखाती है कि धरती, पहाड़ और पौधों पर ग़ौर करें। यह सब अल्लाह की बनाई हुई चीज़ें हैं और उसकी कुदरत की निशानियाँ हैं। जो इंसान इन पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है।
- संतुलन और नियम: इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह की बनाई हर चीज़ में संतुलन है। हर चीज़ एक निश्चित मात्रा और अनुपात में है। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपनी ज़िंदगी में संतुलन रखना चाहिए — खाने, पीने, काम और इबादत में।
- धरती की नेअमतों का शुक्र: अल्लाह ने धरती को हमारे लिए आरामदेह बनाया और उसमें हर तरह की चीज़ें पैदा कीं। यह हमें सिखाता है कि हमें इन नेअमतों का शुक्र अदा करना चाहिए और इन्हें अल्लाह की बताई हुई तरह से इस्तेमाल करना चाहिए।
- अल्लाह पर भरोसा: जिस अल्लाह ने धरती को फैलाया, पहाड़ों से जमाया और हर चीज़ का इंतज़ाम किया, वही हमारी ज़रूरतों का भी ख़याल रखता है। इसलिए हमें उसी पर भरोसा करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
📜 आयत 17-21 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 19
सूरा अल-हिज्र आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़मीन को (भी अपने मख़लूक़ात के रहने सहने को)…सूरा आयत 19/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








