अल-हिज्र · 25/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ ۝٢٥
Wa inna Rabbaka Huwa yahshuruhum; innahoo Hakeem `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा, (क़ियामत के दिन) जमा करेगा।
  • حَكِيمٌ: अपने सारे कामों में पूर्ण ज्ञान और दृढ़ता वाला, हर काम को उचित स्थान पर रखने वाला।
  • عَلِيمٌ: हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखने वाला, जिससे कोई भी बात छिपी नहीं है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब ही वह है जो उन सबको (चाहे वे मक्का के मुशरिकीन हों या पिछली उम्मतों के लोग) क़ियामत के दिन इकट्ठा करके उठाएगा। वह उन सबको उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा—नेकी करने वाले को उसकी नेकी का अच्छा बदला और बुराई करने वाले को उसकी बुराई की सज़ा। यह इकट्ठा करना और हिसाब लेना अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है, क्योंकि वह حَكِيمٌ है—अपने हर फ़ैसले और तदबीर में पूर्ण ज्ञान और हिकमत रखता है, कोई काम बे-मक़सद नहीं करता। और वह عَلِيمٌ है—उसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं, न छोटी और न बड़ी, न ज़मीन के अंदर की और न आसमान के ऊपर की। वह हर इंसान के अमल, उसकी नीयत और उसके दिल के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है, इसलिए उसका हिसाब पूरे इंसाफ़ पर होगा।

फ़ायदे (सबक):

  1. क़ियामत का दिन आना यक़ीनी है, और अल्लाह हर इंसान को ज़िंदा करके इकट्ठा करेगा—यह हमारे लिए ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा करता है कि हम अपने हर अमल को संभालकर रखें।
  2. अल्लाह की हिकमत और इल्म हमें यक़ीन दिलाता है कि दुनिया में जो भी नाइंसाफ़ी दिखती है, वह उस दिन ज़रूर दूर होगी; कोई ज़ालिम बच नहीं पाएगा और कोई मज़लूम की फ़रियाद सुनी नहीं जाएगी।
  3. यह आयत हमें अल्लाह पर भरोसा करना सिखाती है—जब हम जानते हैं कि हमारा रब सब कुछ जानता है और हर काम हिकमत से करता है, तो हमारा दिल उसकी रहमत और इंसाफ़ पर पूरा भरोसा करता है।
  4. यह हमें आख़िरत की तैयारी की तरग़ीब देती है—जो इंसान इस यक़ीन के साथ ज़िंदगी गुज़ारता है कि उसे उठना है और हिसाब देना है, वह गुनाहों से बचता है और नेकियों में जुट जाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-हिज्र

23وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि हम ही (लोगों को) जिलाते और हम ही मार डालते हैं और (फिर) हम ही (सब के) वाली वारिस हैं
24وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ
और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं
25وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
26وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया
27وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ السَّمُومِ
और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया
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अनुवाद — अल-हिज्र 25

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Tuesday, August 18, 2026

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