अल-हिज्र · 26/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ ۝٢٦
Wa laqad khalaqnal insaana min salsaalim min hama im masnoon
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَلْصَالٍ (सल्साल): सूखी हुई मिट्टी जो बजने की आवाज़ देती हो।
  • حَمَإٍ (हमअ): काली, बदबूदार और बदली हुई मिट्टी।
  • مَسْنُونٍ (मस्नून): वह मिट्टी जो देर तक पड़ी रहने से बदबूदार हो गई हो, या जिसे आकार दिया गया हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इंसान (आदम अलैहिस्सलाम) को सूखी हुई मिट्टी से पैदा किया, जो बजने की आवाज़ देती थी। वह मिट्टी काली और बदबूदार थी, क्योंकि वह लंबे समय तक पड़ी रही थी और उसका रंग और गंध बदल गया था। यह मिट्टी पानी में भिगोई गई, फिर सुखाई गई, यहाँ तक कि वह सूखकर ऐसी हो गई कि जब उसे टटोला जाता या उस पर कोई चीज़ गिरती तो आवाज़ आती। इसी मिट्टी से अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम को अपने हाथों से बनाया और फिर उनमें अपनी रूह फूँकी। यहाँ "इंसान" से मुराद आदम अलैहिस्सलाम हैं, और उनकी संतान भी इसी सिलसिले में शामिल है, क्योंकि सब उन्हीं की नस्ल से हैं।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें इंसान की कमज़ोर और मामूली शुरुआत की याद दिलाती है — वह मिट्टी से बना है, इसलिए उसे घमंड और अहंकार नहीं करना चाहिए।
  2. अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि उसने बदबूदार मिट्टी से इतना खूबसूरत और अक्लमंद इंसान बनाया, जो ज़मीन का ख़लीफ़ा बना।
  3. यह हमें सिखाता है कि इंसान की असली इज़्ज़त उसकी मिट्टी में नहीं, बल्कि अल्लाह की रूह और ईमान में है, जो उसमें फूँकी गई।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि इंसान को अपनी पैदाइश की हक़ीक़त पर ग़ौर करना चाहिए ताकि वह अल्लाह की बड़ाई और अपनी अहमियत को समझे और उसकी इबादत में लगा रहे।


📜 आयत 24-28 — अल-हिज्र

24وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ
और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं
25وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
26وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया
27وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ السَّمُومِ
और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया
28وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं एक आदमी को खमीर दी हुई मिट्टी से (जो सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा करने वाला हूँ
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अनुवाद — अल-हिज्र 26

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Tuesday, August 18, 2026

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