अल-हिज्र · 24/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ ۝٢٤
Wa la qad `alimnal mustaqdimeena minkum wa laqad `alimnal mustaakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المُسْتَقْدِمِينَ: आगे बढ़ने वाले, अर्थात जो पहले गुज़र चुके हैं (जन्म और मृत्यु में पहले)।
  • المُسْتَأْخِرِينَ: पीछे रहने वाले, अर्थात जो बाद में आने वाले हैं (जन्म और मृत्यु में बाद में)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उन सभी को जान लिया है जो तुममें से पहले गुज़र चुके हैं—चाहे वे आदम अलैहिस्सलाम के समय से लेकर अब तक के हों—और हमने उन सभी को भी जान लिया है जो अभी आने वाले हैं, यानी क़ियामत के दिन तक पैदा होने वाले सभी लोग। हमारे ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न उनकी जन्म की तारीख़, न मृत्यु का समय, न उनके कर्म। यह ज्ञान हमारे लिए पूर्ण और स्पष्ट है, और हम हर एक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देंगे। यह आयत इस बात की ओर संकेत करती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है—चाहे वह अतीत में हो या भविष्य में, चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का ज्ञान असीमित है—वह हर उस चीज़ को जानता है जो हुई, हो रही है और होगी। यह हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और क़ुदरत का एहसास पैदा करता है।
  2. यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे हर कर्म को अल्लाह देख रहा है और उसका हिसाब रखा जा रहा है, चाहे हम उसे छिपाएँ या ज़ाहिर करें। इससे हमारे अंदर अच्छे काम करने की तौफ़ीक़ और बुरे कामों से बचने का जज़्बा पैदा होता है।
  3. यह जानना कि अल्लाह ने हमारे आगे-पीछे के सभी लोगों को जान लिया है, हमें यह विश्वास दिलाता है कि अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ हर किसी तक पहुँचेगा—चाहे वह किसी भी ज़माने में क्यों न हो। यह हमें अल्लाह की इबादत पर साबित क़दम रहने की तरग़ीब देता है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में हर युग के लोगों के लिए बराबरी का हक़ है—अल्लाह की नज़र में कोई ज़माना दूसरे से बेहतर नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई का मापदंड तक़वा और अमल है।


📜 आयत 22-26 — सूरा अल-हिज्र

22وَأَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَسْقَيْنَاكُمُوهُ وَمَا أَنتُمْ لَهُ بِخَازِنِينَ
और हम ही ने वह हवाएँ भेजी जो बादलों को पानी से (भरे हुए) है फिर हम ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने तुम लोगों को वह पानी पिलाया और तुम लोगों ने तो कुछ उसको जमा करके नहीं रखा था
23وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि हम ही (लोगों को) जिलाते और हम ही मार डालते हैं और (फिर) हम ही (सब के) वाली वारिस हैं
24وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ
और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं
25وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
26وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 24

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Friday, October 2, 2026

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