अल-हिज्र · 27/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ السَّمُومِ ۝٢٧
Waljaaanna khalaqnaahu min qablu min naaris samoom
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • "الجَانّ": जिन्नों के पिता (अर्थात् इब्लीस) को "जान्न" कहा गया है, जैसे आदम (अलैहिस्सलाम) इंसानों के पिता हैं।
  • "السَّمُوم": बहुत तेज़ गर्मी वाली आग, जिसमें धुआँ नहीं होता। यह आग की सबसे तेज़ और भेदने वाली किस्म है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने "जान्न" (यानी जिन्नों के पिता, जो इब्लीस है) को आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से पहले बहुत तेज़ गर्मी वाली आग से पैदा किया। यह आग ऐसी थी जिसमें कोई धुआँ नहीं होता और वह जिस्म के अन्दर तक अपनी तपिश पहुँचा देती है। यहाँ "जान्न" से मुराद इब्लीस है, क्योंकि वही जिन्नों का सरदार और पिता है। यह भी बताया गया कि यह पैदाइश आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से पहले हुई, ताकि यह स्पष्ट हो कि जिन्न इंसानों से पहले पैदा किए गए थे। यह अल्लाह की क़ुदरत की एक निशानी है कि उसने अलग-अलग प्राणियों को अलग-अलग तत्वों से पैदा किया — इंसान को मिट्टी से और जिन्नों को आग से।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की क़ुदरत का एक अज़ीम नमूना है कि उसने जिन्नों को आग से और इंसानों को मिट्टी से बनाया, और यह उसकी बनावट में कोई कमी नहीं दर्शाता — बल्कि उसकी हिकमत और रचना की विविधता को दर्शाता है।
  2. इस आयत से पता चलता है कि इब्लीस आदम (अलैहिस्सलाम) से पहले पैदा हुआ था और उसे इतनी इबादत और बड़ाई मिली थी कि उसे फ़रिश्तों के साथ सजदे का हुक्म दिया गया — लेकिन उसके घमंड और अकड़ ने उसे हलाक कर दिया। यह हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि घमंड इंसान को कितनी बड़ी बर्बादी में डाल सकता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मख़लूक़ात (रचना) में कोई चीज़ बेकार नहीं है; हर चीज़ को उसने एक ख़ास मक़सद से बनाया है। हमें उसकी रचना पर ग़ौर करना चाहिए और उसकी तारीफ़ करनी चाहिए।
  4. इससे यह भी पता चलता है कि इंसान की पैदाइश जिन्न से बाद में हुई, लेकिन अल्लाह ने इंसान को अशरफ़ुल मख़लूक़ात (सबसे बेहतरीन मख़लूक़) बनाया और उसे इल्म और इज़्ज़त अता की — यह अल्लाह की रहमत और इंसान पर उसके एहसान की दलील है।
🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — अल-हिज्र

25وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
26وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया
27وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ السَّمُومِ
और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया
28وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं एक आदमी को खमीर दी हुई मिट्टी से (जो सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा करने वाला हूँ
29فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ
तो जिस वक्त मै उसको हर तरह से दुरुस्त कर चुके और उसमें अपनी (तरफ से) रुह फूँक दूँ तो सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
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अनुवाद — अल-हिज्र 27

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Tuesday, August 18, 2026

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