Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- "الجَانّ": जिन्नों के पिता (अर्थात् इब्लीस) को "जान्न" कहा गया है, जैसे आदम (अलैहिस्सलाम) इंसानों के पिता हैं।
- "السَّمُوم": बहुत तेज़ गर्मी वाली आग, जिसमें धुआँ नहीं होता। यह आग की सबसे तेज़ और भेदने वाली किस्म है।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने "जान्न" (यानी जिन्नों के पिता, जो इब्लीस है) को आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से पहले बहुत तेज़ गर्मी वाली आग से पैदा किया। यह आग ऐसी थी जिसमें कोई धुआँ नहीं होता और वह जिस्म के अन्दर तक अपनी तपिश पहुँचा देती है। यहाँ "जान्न" से मुराद इब्लीस है, क्योंकि वही जिन्नों का सरदार और पिता है। यह भी बताया गया कि यह पैदाइश आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से पहले हुई, ताकि यह स्पष्ट हो कि जिन्न इंसानों से पहले पैदा किए गए थे। यह अल्लाह की क़ुदरत की एक निशानी है कि उसने अलग-अलग प्राणियों को अलग-अलग तत्वों से पैदा किया — इंसान को मिट्टी से और जिन्नों को आग से।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की क़ुदरत का एक अज़ीम नमूना है कि उसने जिन्नों को आग से और इंसानों को मिट्टी से बनाया, और यह उसकी बनावट में कोई कमी नहीं दर्शाता — बल्कि उसकी हिकमत और रचना की विविधता को दर्शाता है।
- इस आयत से पता चलता है कि इब्लीस आदम (अलैहिस्सलाम) से पहले पैदा हुआ था और उसे इतनी इबादत और बड़ाई मिली थी कि उसे फ़रिश्तों के साथ सजदे का हुक्म दिया गया — लेकिन उसके घमंड और अकड़ ने उसे हलाक कर दिया। यह हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि घमंड इंसान को कितनी बड़ी बर्बादी में डाल सकता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मख़लूक़ात (रचना) में कोई चीज़ बेकार नहीं है; हर चीज़ को उसने एक ख़ास मक़सद से बनाया है। हमें उसकी रचना पर ग़ौर करना चाहिए और उसकी तारीफ़ करनी चाहिए।
- इससे यह भी पता चलता है कि इंसान की पैदाइश जिन्न से बाद में हुई, लेकिन अल्लाह ने इंसान को अशरफ़ुल मख़लूक़ात (सबसे बेहतरीन मख़लूक़) बनाया और उसे इल्म और इज़्ज़त अता की — यह अल्लाह की रहमत और इंसान पर उसके एहसान की दलील है।
📜 आयत 25-29 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 27
सूरा अल-हिज्र आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले…सूरा आयत 27/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


