अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَسَجَدَ: उन्होंने सजदा किया (अल्लाह के आदेश के आगे सिर झुकाया)।
- الْمَلَائِكَةُ: फ़रिश्ते (अल्लाह की मख़लूक़ात जो नूर से बनाए गए हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं)।
- كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ: ये दो शब्द एक साथ आए हैं जो पूर्ण समावेश और हर एक फ़रिश्ते के शामिल होने पर ज़ोर देते हैं — यानी कोई भी फ़रिश्ता इससे अलग या बाहर नहीं रहा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) को पैदा करके उन्हें इज़्ज़त और बुलंदी अता की, तो उसने सभी फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि वे आदम को सजदा करें। यह सजदा इबादत का नहीं था, बल्कि अल्लाह के आदेश की ताज़ीम और आदम (अलैहिस्सलाम) की फ़ज़ीलत को मानने का इज़हार था। इस आदेश पर सभी फ़रिश्तों ने बिना किसी हिचकिचाहट या इनकार के, पूरी तरह से अमल किया। उनमें से किसी ने भी उस हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की, न किसी ने देर की और न किसी ने कोई बहाना बनाया। क़ुरआन में "कُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ" के दोनों शब्दों से यह साबित होता है कि यह सजदा हर फ़रिश्ते ने किया — कोई भी फ़रिश्ता इससे बाहर नहीं था। यहाँ अल्लाह ने दो ताकीदी शब्द इस्तेमाल किए हैं ताकि यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाए कि सजदा करने वालों में कोई कमी या अपवाद नहीं था। मगर इसी के साथ अगली आयत में यह बताया जाएगा कि इब्लीस (शैतान) ने इस आदेश की अवहेलना की और सजदा करने से इनकार कर दिया — वह फ़रिश्तों में से नहीं था, बल्कि जिन्नों में से था, इसलिए उसने अपने घमंड और अहंकार की वजह से यह आदेश नहीं माना।
फ़ायदे (उपदेश):
- अल्लाह के आदेश के सामने फ़रिश्तों की तरह पूर्ण समर्पण और आज्ञाकारिता ही सच्ची इबादत है — बिना किसी सवाल या एतराज़ के।
- फ़रिश्ते अल्लाह के नेक और वफ़ादार बंदे हैं, जो कभी उसकी नाफ़रमानी नहीं करते; यह हमारे लिए नमूना है कि हमें भी अल्लाह के हुक्मों को बिना किसी हिचक के मानना चाहिए।
- अल्लाह ने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) को इतनी बुलंदी अता की कि फ़रिश्तों को उनके सामने सजदा करने का हुक्म दिया — यह इंसान की इज़्ज़त और अज़मत को दर्शाता है, बशर्ते वह अल्लाह की इबादत और उसके आदेशों पर चले।
- इस आयत से यह भी सबक मिलता है कि अल्लाह की बात को मानने में किसी भी तरह का घमंड या अहंकार नहीं होना चाहिए; घमंड ही वह चीज़ थी जो इब्लीस को अल्लाह की रहमत से महरूम कर गई।
- यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के फ़ैसले और हुक्म पर पूरा यक़ीन रखें, क्योंकि उसका हर हुक्म हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरा होता है, चाहे हमें उसकी वजह समझ न आए।
📜 आयत 28-32 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 30
सूरा अल-हिज्र आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो…सूरा आयत 30/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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