अल-हिज्र · 30/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ ۝٣٠
Fasajadal malaaa`ikatu kulluhum ajma`oon
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो गए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسَجَدَ: उन्होंने सजदा किया (अल्लाह के आदेश के आगे सिर झुकाया)।
  • الْمَلَائِكَةُ: फ़रिश्ते (अल्लाह की मख़लूक़ात जो नूर से बनाए गए हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं)।
  • كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ: ये दो शब्द एक साथ आए हैं जो पूर्ण समावेश और हर एक फ़रिश्ते के शामिल होने पर ज़ोर देते हैं — यानी कोई भी फ़रिश्ता इससे अलग या बाहर नहीं रहा।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) को पैदा करके उन्हें इज़्ज़त और बुलंदी अता की, तो उसने सभी फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि वे आदम को सजदा करें। यह सजदा इबादत का नहीं था, बल्कि अल्लाह के आदेश की ताज़ीम और आदम (अलैहिस्सलाम) की फ़ज़ीलत को मानने का इज़हार था। इस आदेश पर सभी फ़रिश्तों ने बिना किसी हिचकिचाहट या इनकार के, पूरी तरह से अमल किया। उनमें से किसी ने भी उस हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की, न किसी ने देर की और न किसी ने कोई बहाना बनाया। क़ुरआन में "कُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ" के दोनों शब्दों से यह साबित होता है कि यह सजदा हर फ़रिश्ते ने किया — कोई भी फ़रिश्ता इससे बाहर नहीं था। यहाँ अल्लाह ने दो ताकीदी शब्द इस्तेमाल किए हैं ताकि यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाए कि सजदा करने वालों में कोई कमी या अपवाद नहीं था। मगर इसी के साथ अगली आयत में यह बताया जाएगा कि इब्लीस (शैतान) ने इस आदेश की अवहेलना की और सजदा करने से इनकार कर दिया — वह फ़रिश्तों में से नहीं था, बल्कि जिन्नों में से था, इसलिए उसने अपने घमंड और अहंकार की वजह से यह आदेश नहीं माना।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह के आदेश के सामने फ़रिश्तों की तरह पूर्ण समर्पण और आज्ञाकारिता ही सच्ची इबादत है — बिना किसी सवाल या एतराज़ के।
  2. फ़रिश्ते अल्लाह के नेक और वफ़ादार बंदे हैं, जो कभी उसकी नाफ़रमानी नहीं करते; यह हमारे लिए नमूना है कि हमें भी अल्लाह के हुक्मों को बिना किसी हिचक के मानना चाहिए।
  3. अल्लाह ने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) को इतनी बुलंदी अता की कि फ़रिश्तों को उनके सामने सजदा करने का हुक्म दिया — यह इंसान की इज़्ज़त और अज़मत को दर्शाता है, बशर्ते वह अल्लाह की इबादत और उसके आदेशों पर चले।
  4. इस आयत से यह भी सबक मिलता है कि अल्लाह की बात को मानने में किसी भी तरह का घमंड या अहंकार नहीं होना चाहिए; घमंड ही वह चीज़ थी जो इब्लीस को अल्लाह की रहमत से महरूम कर गई।
  5. यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के फ़ैसले और हुक्म पर पूरा यक़ीन रखें, क्योंकि उसका हर हुक्म हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरा होता है, चाहे हमें उसकी वजह समझ न आए।


📜 आयत 28-32 — सूरा अल-हिज्र

28وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं एक आदमी को खमीर दी हुई मिट्टी से (जो सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा करने वाला हूँ
29فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ
तो जिस वक्त मै उसको हर तरह से दुरुस्त कर चुके और उसमें अपनी (तरफ से) रुह फूँक दूँ तो सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
30فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ
ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो गए
31إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ أَن يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ
मगर इबलीस (मलऊन) की उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इन्कार किया
32قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ
(इस पर ख़ुदा ने) फरमाया आओ शैतान आख़िर तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों के साथ शामिल न हुआ
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 30

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Friday, October 2, 2026

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