अल-हिज्र · 31/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ أَن يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ ۝٣١
Illaaa ibleesa abaaa ai yakoona ma`as saajideen
📖 हिंदी अर्थ
मगर इबलीस (मलऊन) की उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इन्कार किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا إِبْلِيسَ: "इब्लीस" के अलावा। यह निषेध/अपवाद है, जो पिछली आयत में वर्णित सजदा करने वाले फ़रिश्तों से इब्लीस को अलग करता है।
  • أَبَىٰ: उसने इनकार किया, मना कर दिया, या सिरे से अस्वीकार कर दिया। यह शब्द गर्व और हठ के साथ इनकार पर दालालत करता है।
  • أَن يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ: कि वह सजदा करने वालों (फ़रिश्तों) के साथ शामिल हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने पिछली आयत में बताया कि फ़रिश्तों को आदेश दिया गया कि वे आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करें, और उन सभी ने बिना किसी अपवाद के आज्ञा का पालन किया। इस आयत में उसी आदेश से एक अपवाद का ज़िक्र है: "सिवाय इब्लीस के" — उसने सजदा करने से इनकार कर दिया और फ़रिश्तों के साथ शामिल नहीं हुआ।

यहाँ यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इब्लीस मूल रूप से जिन्नात में से था, फ़रिश्तों में से नहीं था, लेकिन अपनी इबादत और अमल के कारण उनके साथ शामिल कर लिया गया था। जब आदेश आया, तो उसने घमंड और अहंकार के कारण आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने से इनकार कर दिया। उसका इनकार केवल एक क्रिया का इनकार नहीं था, बल्कि यह अल्लाह के आदेश के प्रति विद्रोह और अपनी बड़ाई का दावा था। उसने खुद को आदम (अलैहिस्सलाम) से बेहतर समझा, जैसा कि आगे की आयतों में बताया गया है।

यह घटना इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, क्योंकि इसी से शैतान और इंसान के बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई, और यह इंसान के लिए एक सबक़ है कि अहंकार और घमंड इंसान को अल्लाह की आज्ञा से भटका सकता है।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. आज्ञा पालन में पूर्णता: फ़रिश्तों ने बिना किसी सवाल या आपत्ति के अल्लाह के आदेश का पालन किया। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के आदेशों को बिना किसी हिचकिचाहट के मानना चाहिए, चाहे वे हमारी समझ में कितने भी अजीब क्यों न लगें।
  2. अहंकार का विनाश: इब्लीस का पतन उसके अहंकार के कारण हुआ। यह हमारे लिए एक बड़ी चेतावनी है कि घमंड और खुद को दूसरों से बेहतर समझना इंसान को अल्लाह की राह से भटका सकता है और उसे विनाश की ओर ले जा सकता है।
  3. इब्लीस से सावधानी: यह आयत हमें बताती है कि इब्लीस हमारा खुला दुश्मन है, जिसने अल्लाह के आदेश का उल्लंघन किया। हमें उसके धोखों से बचने के लिए अल्लाह की शरण लेनी चाहिए और उसके रास्तों पर चलने से बचना चाहिए।
  4. इंसान की गरिमा: अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को इतना सम्मान दिया कि फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का आदेश दिया। यह इंसान की उच्च स्थिति को दर्शाता है, और हमें इस गरिमा के अनुसार जीवन जीने की कोशिश करनी चाहिए।
  5. विद्रोह का परिणाम: इब्लीस का विद्रोह उसे अल्लाह की रहमत से हमेशा के लिए दूर कर गया। यह सिखाता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बहुत बुरा होता है, और इंसान को अपने कर्मों में सावधानी बरतनी चाहिए।


📜 आयत 29-33 — सूरा अल-हिज्र

29فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ
तो जिस वक्त मै उसको हर तरह से दुरुस्त कर चुके और उसमें अपनी (तरफ से) रुह फूँक दूँ तो सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
30فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ
ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो गए
31إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ أَن يَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ
मगर इबलीस (मलऊन) की उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इन्कार किया
32قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ
(इस पर ख़ुदा ने) फरमाया आओ शैतान आख़िर तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों के साथ शामिल न हुआ
33قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِن صَلْصَالٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
वह (ढिठाई से) कहने लगा मैं ऐसा गया गुज़रा तो हूँ नहीं कि ऐसे आदमी को सजदा कर बैठूँ जिसे तूने सड़ी हुई खन खन बोलने वाली मिट्टी से पैदा किया है
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 31

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Saturday, October 3, 2026

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