अल-हिज्र · 47/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ ۝٤٧
Wa naza`naa ma fee sudoorihim min ghillin ikhwaanan `alaa sururim mutaqaabileen
📖 हिंदी अर्थ
और (दुनिया की तकलीफों से) जो कुछ उनके दिल में रंज था उसको भी हम निकाल देगें और ये बाहम एक दूसरे के आमने सामने तख्तों पर इस तरह बैठे होगें जैसे भाई भाई

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَزَعْنَا: हमने निकाल दिया, दूर कर दिया।
  • غِلّ: क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और बैर जो दिल में हो।
  • سُرُر: 'سَرِير' का बहुवचन, शाही तख्त या आरामगाह।
  • مُتَقَابِلِينَ: एक-दूसरे के सामने (आमने-सामने) बैठे हुए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन परहेज़गारों (ईमानवालों) के बारे में है जिन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उनके सीनों (दिलों) से हर तरह का क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और बैर निकाल दिया। दुनिया में जो आपसी रंजिश, ईर्ष्या या दुश्मनी के जज़्बात थे, उन्हें हमने पूरी तरह से जड़ से मिटा दिया। अब वे जन्नत में आपस में भाई-भाई बनकर रहते हैं, उनके दिलों में एक-दूसरे के लिए सिर्फ़ मुहब्बत और सच्ची भाईचारा है। वे ऊँचे तख्तों (सुरुर) पर बैठे होते हैं, आमने-सामने, ताकि एक-दूसरे का चेहरा देखकर खुशी और अनुराग बढ़े। उनके बीच कोई पर्दा या दूरी नहीं होती, न कोई किसी की पीठ की तरफ़ बैठता है, बल्कि सब एक-दूसरे के सामने होते हैं, जो आपसी मुहब्बत और सम्मान की निशानी है। यह उनकी दुनियावी कमज़ोरियों और बुराइयों से पाक और साफ़ ज़िंदगी की झलक है।


फ़ायदे (सबक):

  1. दिल की सफ़ाई ही जन्नत की कुंजी है: जो लोग दुनिया में अपने दिलों को क्रोध, ईर्ष्या और बैर से पाक रखते हैं, अल्लाह उन्हें जन्नत में भी वैसी ही पाक ज़िंदगी अता करेगा। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और दूसरों के प्रति नफ़रत नहीं रखनी चाहिए।
  2. मुहब्बत और भाईचारा इस्लाम की रूह है: जन्नत में भी लोग भाई-भाई बनकर रहेंगे, तो दुनिया में भी हमें आपसी मुहब्बत और एकता को अपनाना चाहिए। ईर्ष्या और द्वेष इंसान को जन्नत से दूर करते हैं।
  3. अल्लाह की रहमत हर बुराई को मिटा सकती है: अल्लाह चाहे तो इंसान के दिल से सबसे गहरी नफ़रत को भी निकालकर उसकी जगह मुहब्बत डाल सकता है। यह हमें अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा करना सिखाता है।
  4. जन्नत की नेमतें सिर्फ़ जिस्मानी नहीं, बल्कि रूहानी भी हैं: सबसे बड़ी नेमत दिलों की सफ़ाई और आपसी मुहब्बत है, जो हर तकलीफ़ और रंजिश से पाक हो। यह हमें दुनिया में भी अच्छे अख़लाक़ अपनाने की तरग़ीब देता है।


📜 आयत 45-49 — सूरा अल-हिज्र

45إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
और परहेज़गार तो बेहश्त के बाग़ों और चश्मों मे यक़ीनन होंगे
46ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ
(दाख़िले के वक्त फ़रिश्ते कहेगें कि) उनमें सलामती इत्मिनान से चले चलो
47وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ
और (दुनिया की तकलीफों से) जो कुछ उनके दिल में रंज था उसको भी हम निकाल देगें और ये बाहम एक दूसरे के आमने सामने तख्तों पर इस तरह बैठे होगें जैसे भाई भाई
48لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ
उनको बेहश्त में तकलीफ छुएगी भी तो नहीं और न कभी उसमें से निकाले जाएँगें
49۞ نَبِّئْ عِبَادِي أَنِّي أَنَا الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(ऐ रसूल) मेरे बन्दों को आगाह करो कि बेशक मै बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
अल-हिज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हिज्र 47

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Friday, October 2, 2026

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