अल-हिज्र · 78/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَإِن كَانَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ لَظَالِمِينَ ۝٧٨
Wa in kaana Ashaabul Aikati lazaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और एैका के रहने वाले (क़ौमे शुएब की तरह बड़े सरकश थे)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ: "अैकah" उस घने जंगल को कहते हैं जिसमें पेड़ आपस में मिले हुए हों। यहाँ इससे मुराद शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम है, जो उस घने दरख़्तों वाले इलाक़े में रहती थी।
  • لَظَالِمِينَ: यानी बिल्कुल ज़ालिम थे, अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि "अैकah" वालों (यानी शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम) ने भी अपने नबी को झुठलाया और कुफ़्र पर क़ायम रहे। वे लोग अपने शिर्क, कुफ़्र और रसूल की तकज़ीब की वजह से अपनी जानों पर ज़ुल्म कर रहे थे। उन्होंने अल्लाह के हुक्म को नहीं माना, नबी की दावत को रद्द किया और अपने बुरे आमाल पर अड़े रहे। यह ज़ुल्म उनका अपने ऊपर था, क्योंकि उन्होंने अपने लिए अज़ाब का सामान किया। इसके बाद अल्लाह ने उन्हें "दिन के सायबान" (बादल) के अज़ाब से पकड़ा और उनकी सरकशी का अंजाम भुगताया। यह ज़िक्र पिछली आयतों में लूत की क़ौम के हालात के बाद किया गया है, ताकि अंदाज़ा हो कि ये क़ौमें भी उन्हीं की तरह ज़ालिम थीं और उनका अंजाम भी वैसा ही हुआ।

फ़ायदे:

  1. ज़ुल्म की कोई भी सूरत हो — चाहे वह कुफ़्र हो, शिर्क हो या अल्लाह के हुक्म की उल्लंघना — वह इंसान के अपने नुक़सान का सबब बनती है। ज़ालिम चाहे दूसरों पर ज़ुल्म करे या अपनी जान पर, अंजाम बुरा ही होता है।
  2. अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जो क़ौमें नबियों को झुठलाती हैं, उन्हें अल्लाह अपनी क़ुदरत से ऐसे अज़ाब में पकड़ता है जिसका उन्हें गुमान भी नहीं होता।
  3. इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई शरीअत पर चलें, क्योंकि पिछली क़ौमों की तबाही सिर्फ़ नाफ़रमानी की वजह से हुई।
  4. अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके इंसाफ़ पर क़ायम हैं। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि बंदे ख़ुद अपने आमाल से अपनी तबाही बुलाते हैं।


📜 आयत 76-80 — सूरा अल-हिज्र

76وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ
के रास्ते पर है
77إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ
इसमें तो शक हीं नहीं कि इसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
78وَإِن كَانَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ لَظَالِمِينَ
और एैका के रहने वाले (क़ौमे शुएब की तरह बड़े सरकश थे)
79فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ
तो उन से भी हमने (नाफरमानी का) बदला लिया और ये दो बस्तियाँ (क़ौमे लूत व शुएब की) एक खुली हुई यह राह पर (अभी तक मौजूद) हैं
80وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ
और इसी तरह हिज्र के रहने वालों (क़ौम सालेह ने भी) पैग़म्बरों को झुठलाया
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
78आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 78

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Saturday, October 3, 2026

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