Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ: हमने उनसे बदला लिया, अर्थात उन्हें उनके कुकर्मों की सज़ा दी।
- وَإِنَّهُمَا: और वे दोनों (बस्तियाँ) — अर्थात क़ौमे-लूत की बस्तियाँ और 'आयकाह' (बन वाली बस्ती) जो क़ौमे-शु'ऐब की थी।
- لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ: अवश्य ही एक स्पष्ट और खुले रास्ते पर हैं — यानी वे बस्तियाँ ऐसे रास्ते पर हैं जो यात्रियों के लिए प्रत्यक्ष और पहचानने योग्य है।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि हमने उन (क़ौमे-लूत और क़ौमे-शु'ऐब) से बदला लिया — यानी उन्हें उनके अत्याचार, कुफ़्र और नाफ़रमानी की सज़ा दी। क़ौमे-लूत को पत्थरों की बारिश और उलटी हुई बस्तियों से हलाक किया गया, और क़ौमे-शु'ऐब (अर्थात 'आयकाह' वाले) को ज़लज़ले और 'दिन के सायबान' (बादल) के अज़ाब से नष्ट कर दिया गया।
फिर अल्लाह फ़रमाते हैं: "और वे दोनों (बस्तियाँ) अवश्य ही एक स्पष्ट रास्ते पर हैं" — यानी क़ौमे-लूत की बस्तियाँ (सदूम) और 'आयकाह' की बस्तियाँ उस मुख्य मार्ग पर स्थित हैं जिससे लोग सफ़र करते हुए गुज़रते हैं। यह बस्तियाँ आज भी उन लोगों के लिए एक ज़िंदा निशानी और सबक़ हैं जो उनके पास से गुज़रते हैं। वे अपनी आँखों से देख सकते हैं कि अल्लाह की नाफ़रमानी करने वालों का अंजाम क्या होता है। यह एक स्पष्ट रास्ता है जो लोगों को सोचने और सीखने की दावत देता है।
फ़ायदे (उपदेश):
- अल्लाह की सज़ा अटल है: जब अल्लाह किसी क़ौम पर अज़ाब लाता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें।
- इतिहास से सबक़ लेना: अल्लाह ने पुरानी क़ौमों के निशानात इसलिए बाक़ी रखे ताकि आने वाली नस्लें उनसे सबक़ हासिल करें। यह हमें सिखाता है कि हमें इतिहास से सीखना चाहिए और उन ग़लतियों को दोहराने से बचना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा: जहाँ अल्लाह सज़ा देता है, वहीं वह तौबा करने वालों को माफ़ भी करता है। यह हमें उसकी रहमत की तरफ़ राग़िब करता है कि हम अपनी ग़लतियों पर नादिम हों और उसकी तरफ़ पलटें।
- यात्रा में सोचना: जब हम सफ़र करते हैं और उन जगहों से गुज़रते हैं जहाँ अल्लाह का अज़ाब आया था, तो हमें उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करना चाहिए और अपने आचरण को सुधारना चाहिए।
- क़ुरआन की हिदायत: यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने और उससे सीखने के लिए है। यह हमें उस किताब की अहमियत समझाती है जो हमें सीधे रास्ते पर चलने की तालीम देती है।
📜 आयत 77-81 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 79
सूरा अल-हिज्र आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उन से भी हमने (नाफरमानी का) बदला लिया और…सूरा आयत 79/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


