अल-हिज्र · 83/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ ۝٨٣
Fa akhazat humus saihatu musbiheen
📖 हिंदी अर्थ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصَّيْحَةُ: (अत्यधिक तेज़) चीख़ या आवाज़, जिसका अर्थ यहाँ अज़ाब (यातना) की वह भयानक आवाज़ है जो अचानक आ जाती है।
  • مُصْبِحِينَ: सुबह के समय (सुबह होते ही)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब समुदाय (समूद) ने हठ और अहंकार पर उतर आए और अपने पैग़म्बर हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) की नसीहत को नकार दिया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर सुबह के समय आ पहुँचा। यह वही समय था जब लोग अपनी नींद से उठकर अपने दिन के कामों में लगने की तैयारी कर रहे थे, और अचानक एक भयानक चीख़ (सैहा) ने उन्हें अपनी लपेट में ले लिया। यह चीख़ इतनी भयावह और विनाशकारी थी कि उसने उन्हें उसी वक़्त तबाह कर दिया। उनकी ताक़त, उनके पहाड़ों को काटकर बनाए गए घर, और उनकी सांसारिक उपलब्धियाँ — इनमें से कोई भी चीज़ उन्हें अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकी। वे सुबह के समय मरकर इस दुनिया से इस तरह उठा लिए गए जैसे वे कभी थे ही नहीं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का अज़ाब किसी को ख़बरदार किए बिना भी आ सकता है, इसलिए इंसान को हर वक़्त अल्लाह की आज्ञाकारिता में रहना चाहिए और अपने गुनाहों से तौबा करते रहना चाहिए।
  2. सांसारिक ताक़त, धन-दौलत और मज़बूत इमारतें अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकतीं; असली सुरक्षा केवल ईमान और नेक अमल में है।
  3. अल्लाह की यातना में देरी उसकी रहमत और मोहलत है, लेकिन जब वह आ जाती है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और न ही उसकी पकड़ से बेख़ौफ़ होना चाहिए।
  4. यह क़िस्सा हमें बताता है कि पैग़म्बरों की नसीहत को ठुकराने का अंजाम बहुत बुरा होता है, और अल्लाह के आदेशों का पालन करना ही सच्ची कामयाबी है।


📜 आयत 81-85 — सूरा अल-हिज्र

81وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और (बावजूद कि) हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दी उस पर भी वह लोग उनसे रद गिरदानी करते रहे
82وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे
83فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला
84فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
फिर जो कुछ वह अपनी हिफाज़त की तदबीर किया करते थे (अज़ाब ख़ुदा से बचाने में) कि कुछ भी काम न आयीं
85وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ ۖ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِيلَ
और हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है हिकमत व मसलहत से पैदा किया है और क़यामत यक़ीनन ज़रुर आने वाली है तो तुम (ऐ रसूल) उन काफिरों से शाइस्ता उनवान (अच्छे बरताव) के साथ दर गुज़र करो
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
83आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 83

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Thursday, October 1, 2026

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