अल-हिज्र · 82/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ ۝٨٢
Wa kaanoo yanhitoona minal jibaali buyootan aamineen
📖 हिंदी अर्थ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنْحِتُونَ: पत्थरों को तराशना, काटना (छेनी और हथौड़े जैसे औजारों से पहाड़ों को काटकर आकार देना)।
  • مِنَ الْجِبَالِ: पहाड़ों से।
  • بُيُوتًا: घर, आवास।
  • آمِنِينَ: निडर, भयमुक्त, सुरक्षित।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत समूद (समुद) क़ौम का ज़िक्र कर रही है, जो अपनी ताकत और हुनर में मशहूर थी। वे पहाड़ों को तराशकर उनमें घर बनाते थे। वे बड़ी मेहनत और कुशलता से पत्थरों को काटते, उन्हें चिकना करते और फिर उन्हीं पहाड़ों के अंदर अपने लिए मकान तैयार करते थे। ये घर इतने मज़बूत होते थे कि उन्हें इस बात का डर नहीं होता था कि ये गिर जाएँगे या खराब हो जाएँगे। वे ज़िंदगी की सुरक्षा और आराम की चिंता से मुक्त होकर, अपनी इस दुनियावी ताकत और कारीगरी पर इतराते थे। उन्होंने यह सोचा कि ये पत्थर के मज़बूत घर उन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित रखेंगे, लेकिन वे भूल गए कि अल्लाह की पकड़ से कोई चीज़ नहीं बचा सकती। उनकी यही ग़ुरूर और अकड़ आख़िरकार उनके विनाश का कारण बनी, जब अल्लाह का अज़ाब आया तो उनके ये मज़बूत घर उनके किसी काम नहीं आए।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनियावी ताकत, हुनर और तरक्की पर घमंड नहीं करना चाहिए। इंसान चाहे कितनी ही मज़बूत इमारतें बना ले, लेकिन अल्लाह की क़ुदरत के आगे सब बेबस है।
  2. हमें अपनी ज़िंदगी की सुरक्षा और बेहतरी के लिए अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, न कि सिर्फ दुनियावी ज़रियों पर।
  3. यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की नेमतें (जैसे ताकत, हुनर, माल) उसकी इबादत और शुक्र के लिए हैं, न कि नाफ़रमानी और ग़ुरूर के लिए। जो इन नेमतों का गलत इस्तेमाल करता है, उसका अंजाम बहुत बुरा होता है।
  4. क़ुरआन हमें इतिहास से सबक लेने की तरग़ीब देता है ताकि हम उन लोगों के अंजाम से सीखें जो अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ते हैं, और अपनी ज़िंदगी को सीधे रास्ते पर चलाएँ।


📜 आयत 80-84 — सूरा अल-हिज्र

80وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ
और इसी तरह हिज्र के रहने वालों (क़ौम सालेह ने भी) पैग़म्बरों को झुठलाया
81وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और (बावजूद कि) हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दी उस पर भी वह लोग उनसे रद गिरदानी करते रहे
82وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे
83فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला
84فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
फिर जो कुछ वह अपनी हिफाज़त की तदबीर किया करते थे (अज़ाब ख़ुदा से बचाने में) कि कुछ भी काम न आयीं
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 82

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Thursday, October 1, 2026

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