अल-हिज्र · 84/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ ۝٨٤
Famaaa aghnaa `anhum maa kaanoo yaksiboon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जो कुछ वह अपनी हिफाज़त की तदबीर किया करते थे (अज़ाब ख़ुदा से बचाने में) कि कुछ भी काम न आयीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَمَا أَغْنَىٰ: तो कुछ भी काम न आया, कोई लाभ नहीं पहुँचाया।
  • عَنْهُم: उनसे, उनके काम न आया।
  • مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ: जो कुछ वे कमाते थे (धन, संपत्ति, बल, और सांसारिक साधन)।

व्याख्या:

जब अल्लाह का आदेश आया और उन पर प्रातःकाल का यातना (पत्थरों की बारिश या भयंकर चीख़) टूट पड़ी, तो उनका सारा धन-दौलत, ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों में बने मज़बूत किले, उनकी ताकत, उनकी संख्या, उनके हथियार, और वह सब कुछ जो उन्होंने जीवन भर कमाया और जमा किया था — उनमें से किसी भी चीज़ ने उन्हें अल्लाह की यातना से नहीं बचाया। न उनका धन उनके काम आया, न उनकी शक्ति, न उनके महल और न ही उनकी चतुराई। यह सब कुछ उनके लिए बेकार साबित हुआ और वे पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। यह इस बात का सबूत है कि सांसारिक साधन और उपलब्धियाँ अल्लाह की यातना को टालने में असमर्थ हैं।


शिक्षाएँ और लाभ:

  1. धन-दौलत और सांसारिक साधन अल्लाह की यातना से नहीं बचा सकते — यह एक स्पष्ट सबक है कि इंसान चाहे कितना ही धनवान, शक्तिशाली और साधन-संपन्न क्यों न हो, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। इसलिए इंसान को अपनी ताकत और साधनों पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  2. असली सुरक्षा अल्लाह की राह में है — जो व्यक्ति अल्लाह की आज्ञा का पालन करता है और उसकी राह में अपना धन खर्च करता है, वही वास्तव में सुरक्षित है। सांसारिक संपत्ति का संग्रह नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में खर्च करना ही इंसान को यातना से बचा सकता है।
  3. संसार की चीज़ें क्षणभंगुर हैं — यह आयत हमें याद दिलाती है कि संसार की सारी चीज़ें, चाहे वे कितनी भी बड़ी और मज़बूत क्यों न हों, अंततः नष्ट हो जाने वाली हैं। इसलिए इंसान को अपना भरोसा अल्लाह पर रखना चाहिए, न कि अपनी दौलत और ताकत पर।
  4. आज्ञाकारिता ही सफलता की कुंजी है — जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं, वे सफल होते हैं, चाहे उनके पास सांसारिक साधन कम हों। और जो लोग अल्लाह की अवज्ञा करते हैं, उनके साधन उनके किसी काम नहीं आते।


📜 आयत 82-86 — सूरा अल-हिज्र

82وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे
83فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला
84فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
फिर जो कुछ वह अपनी हिफाज़त की तदबीर किया करते थे (अज़ाब ख़ुदा से बचाने में) कि कुछ भी काम न आयीं
85وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ السَّاعَةَ لَآتِيَةٌ ۖ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِيلَ
और हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है हिकमत व मसलहत से पैदा किया है और क़यामत यक़ीनन ज़रुर आने वाली है तो तुम (ऐ रसूल) उन काफिरों से शाइस्ता उनवान (अच्छे बरताव) के साथ दर गुज़र करो
86إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَلِيمُ
इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा पैदा करने वाला है
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
84आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 84

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Thursday, October 1, 2026

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