अन-नहल · 40/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْنَاهُ أَن نَّقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ ۝٤٠
Innamaa qawlunaa lisha y`in izaa aradnaahu an naqoola lahoo kun fa yakoon
📖 हिंदी अर्थ
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَوْلُنَا: हमारा कहना / हमारा आदेश
  • لِشَيْءٍ: किसी चीज़ के लिए
  • إِذَا أَرَدْنَاهُ: जब हम उसे चाहते हैं
  • كُن: हो जा
  • فَيَكُونُ: तो वह हो जाती है

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी कुदरत (शक्ति) का बयान कर रहे हैं कि मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना और उन्हें उठाना हमारे लिए बिल्कुल आसान है। हमारा मामला जब किसी चीज़ को पैदा करने का होता है, तो हमें न किसी औज़ार की ज़रूरत होती है, न किसी मदद की, न किसी समय की। हमारा तरीक़ा सिर्फ़ यह है कि हम उस चीज़ को कहते हैं: "हो जा", और वह तुरंत हो जाती है। यह अल्लाह की शान है कि उसका आदेश जारी होते ही चीज़ें वजूद में आ जाती हैं, बिना किसी रुकावट या देरी के। यही हाल मुर्दों के ज़िंदा होने का है — जब अल्लाह चाहेगा, उनसे कहेगा "हो जाओ", और वे क़ब्रों से उठ खड़े होंगे। अल्लाह के लिए किसी भी चीज़ का पैदा करना, चाहे वह आसमान और ज़मीन जैसी बड़ी हो या मुर्दे को ज़िंदा करना जैसा मुश्किल काम, बिल्कुल एक जैसा आसान है। उसकी कुदरत के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं, कोई चीज़ बड़ी नहीं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की कुदरत असीमित है — वह जब चाहे, जैसे चाहे, बिना किसी साधन के हर काम कर सकता है। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है कि अल्लाह के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं।
  2. क़ियामत के दिन मुर्दों का ज़िंदा होना यक़ीनी है, क्योंकि यह अल्लाह के लिए उतना ही आसान है जितना किसी चीज़ का पहली बार पैदा करना। इससे मुसलमान को आख़िरत के इम्तिहान की तैयारी का जज़्बा मिलता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें — जब वह किसी काम का इरादा कर लेता है, तो उसे पूरा करके ही रहता है। हमारी ज़िंदगी की हर मुश्किल, हर परेशानी अल्लाह के एक "कुन" (हो जा) से हल हो सकती है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रचना में कोई थकान या मेहनत नहीं — वह सिर्फ़ आदेश देता है और काम हो जाता है। यह हमें अल्लाह की बड़ाई और उसकी तारीफ़ की तरफ़ ले जाता है, और हमें उसके आगे अपनी कमज़ोरी और अहमियत का एहसास कराता है।


📜 आयत 38-42 — अन-नहल

38وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ ۙ لَا يَبْعَثُ اللَّهُ مَن يَمُوتُ ۚ بَلَىٰ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं
39لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِبِينَ
(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे
40إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْنَاهُ أَن نَّقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)
41وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने (कुफ्फ़ार के ज़ुल्म पर ज़ुल्म सहने के बाद ख़ुदा की खुशी के लिए घर बार छोड़ा हिजरत की हम उनको ज़रुर दुनिया में भी अच्छी जगह बिठाएँगें और आख़िरत की जज़ा तो उससे कहीं बढ़ कर है काश ये लोग जिन्होंने ख़ुदा की राह में सख्तियों पर सब्र किया
42الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
और अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (आख़िरत का सवाब) जानते होते
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अनुवाद — अन-नहल 40

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Tuesday, August 18, 2026

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