Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيُبَيِّنَ لَهُمُ – उन्हें स्पष्ट कर दे
- يَخْتَلِفُونَ فِيهِ – जिस चीज़ में वे मतभेद करते हैं
- وَلِيَعْلَمَ – और ताकि जान लें
- كَاذِبِينَ – झूठे
तफ़सीर:
अल्लाह तआला सभी लोगों को क़यामत के दिन अवश्य उठाएगा, ताकि उन्हें वह सब कुछ स्पष्ट कर दे जिसमें वे दुनिया में मतभेद करते थे। यानी तौहीद (एकेश्वरवाद), रिसालत (पैग़म्बरी) और आख़िरत (पुनरुत्थान) के मामले में लोग अलग-अलग राय और विश्वास रखते थे। कुछ ने अल्लाह के साथ साझीदार ठहराए, कुछ ने पैग़म्बरों को झुठलाया और कुछ ने क़यामत के दिन को नकार दिया। अल्लाह उस दिन सबके सामने सच्चाई को उजागर कर देगा, ताकि हर कोई यह देख ले कि सत्य क्या था और असत्य क्या था।
इसके अलावा, इस पुनरुत्थान का एक और उद्देश्य यह भी है कि जिन लोगों ने कुफ़्र किया और क़यामत के आने से इनकार किया, वे स्वयं जान लें कि वे अपने दावों में झूठे थे। उन्होंने दुनिया में क़समें खाकर कहा था कि अल्लाह किसी को दोबारा नहीं उठाएगा, लेकिन जब वे उठाए जाएँगे और अपनी आँखों से वह सब कुछ देखेंगे जिसे वे नकारते थे, तो उन्हें अपनी झूठ का एहसास होगा और उनके पास कोई बहाना नहीं बचेगा।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है — वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि सब कुछ स्पष्ट करके फ़ैसला करेगा, ताकि किसी को शिकायत की गुंजाइश न रहे।
- क़यामत का दिन सच्चाई के प्रकट होने का दिन है। इसलिए हमें दुनिया में सच्चाई पर चलना चाहिए, चाहे लोगों के मतभेद कुछ भी हों।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो लोग सत्य को नकारते हैं और झूठ पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम शर्मिंदगी और पछतावा है। इसलिए हमें हमेशा सत्य की तलाश करनी चाहिए और उसे अपनाना चाहिए।
- अल्लाह का पुनरुत्थान हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया आख़िरी मंज़िल नहीं है; एक बेहतर और अनंत जीवन हमारा इंतज़ार कर रहा है, जहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा। यह विश्वास हमें अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
📜 आयत 37-41 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 39
सूरा अन-नहल आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर…सूरा आयत 39/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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