अन-नहल · 39/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِبِينَ ۝٣٩
Liyubaiyina lahumul lazee yakhtalifoona feehi wa liya`lamal lazeena kafarooo annahum kaanoo kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيُبَيِّنَ لَهُمُ – उन्हें स्पष्ट कर दे
  • يَخْتَلِفُونَ فِيهِ – जिस चीज़ में वे मतभेद करते हैं
  • وَلِيَعْلَمَ – और ताकि जान लें
  • كَاذِبِينَ – झूठे

तफ़सीर:

अल्लाह तआला सभी लोगों को क़यामत के दिन अवश्य उठाएगा, ताकि उन्हें वह सब कुछ स्पष्ट कर दे जिसमें वे दुनिया में मतभेद करते थे। यानी तौहीद (एकेश्वरवाद), रिसालत (पैग़म्बरी) और आख़िरत (पुनरुत्थान) के मामले में लोग अलग-अलग राय और विश्वास रखते थे। कुछ ने अल्लाह के साथ साझीदार ठहराए, कुछ ने पैग़म्बरों को झुठलाया और कुछ ने क़यामत के दिन को नकार दिया। अल्लाह उस दिन सबके सामने सच्चाई को उजागर कर देगा, ताकि हर कोई यह देख ले कि सत्य क्या था और असत्य क्या था।

इसके अलावा, इस पुनरुत्थान का एक और उद्देश्य यह भी है कि जिन लोगों ने कुफ़्र किया और क़यामत के आने से इनकार किया, वे स्वयं जान लें कि वे अपने दावों में झूठे थे। उन्होंने दुनिया में क़समें खाकर कहा था कि अल्लाह किसी को दोबारा नहीं उठाएगा, लेकिन जब वे उठाए जाएँगे और अपनी आँखों से वह सब कुछ देखेंगे जिसे वे नकारते थे, तो उन्हें अपनी झूठ का एहसास होगा और उनके पास कोई बहाना नहीं बचेगा।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है — वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि सब कुछ स्पष्ट करके फ़ैसला करेगा, ताकि किसी को शिकायत की गुंजाइश न रहे।
  2. क़यामत का दिन सच्चाई के प्रकट होने का दिन है। इसलिए हमें दुनिया में सच्चाई पर चलना चाहिए, चाहे लोगों के मतभेद कुछ भी हों।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो लोग सत्य को नकारते हैं और झूठ पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम शर्मिंदगी और पछतावा है। इसलिए हमें हमेशा सत्य की तलाश करनी चाहिए और उसे अपनाना चाहिए।
  4. अल्लाह का पुनरुत्थान हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया आख़िरी मंज़िल नहीं है; एक बेहतर और अनंत जीवन हमारा इंतज़ार कर रहा है, जहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा। यह विश्वास हमें अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अन-नहल

37إِن تَحْرِصْ عَلَىٰ هُدَاهُمْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَن يُضِلُّ ۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
(ऐ रसूल) अगर तुमको इन लोगों के राहे रास्त पर जाने का हौका है (तो बे फायदा) क्योंकि ख़ुदा तो हरगिज़ उस शख़्श की हिदायत नहीं करेगा जिसको (नाज़िल होने की वजह से) गुमराही में छोड़ देता है और न उनका कोई मददगार है
38وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ ۙ لَا يَبْعَثُ اللَّهُ مَن يَمُوتُ ۚ بَلَىٰ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं
39لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِبِينَ
(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे
40إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْنَاهُ أَن نَّقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)
41وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने (कुफ्फ़ार के ज़ुल्म पर ज़ुल्म सहने के बाद ख़ुदा की खुशी के लिए घर बार छोड़ा हिजरत की हम उनको ज़रुर दुनिया में भी अच्छी जगह बिठाएँगें और आख़िरत की जज़ा तो उससे कहीं बढ़ कर है काश ये लोग जिन्होंने ख़ुदा की राह में सख्तियों पर सब्र किया
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अनुवाद — अन-नहल 39

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Tuesday, August 18, 2026

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