Wa laa taqtulooo awlaadakum khashyata imlaaq; nahnu narzuquhum wa iyyaakum; inna qatlahum kaana khitan kabeeraa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और (लोगों) मुफलिसी (ग़रीबी) के ख़ौफ से अपनी औलाद को क़त्ल न करो (क्योंकि) उनको और तुम को (सबको) तो हम ही रोज़ी देते हैं बेशक औलाद का क़त्ल करना बहुत सख्त गुनाह है
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اور اپنی اولاد کو مفلسی کے خوف سے قتل نہ کرنا۔ (کیونکہ) ان کو اور تم کو ہم ہی رزق دیتے ہیں۔ کچھ شک نہیں کہ ان کا مار ڈالنا بڑا سخت گناہ ہے
और (लोगों) मुफलिसी (ग़रीबी) के ख़ौफ से अपनी औलाद को क़त्ल न करो (क्योंकि) उनको और तुम को (सबको) तो हम ही रोज़ी देते हैं बेशक औलाद का क़त्ल करना बहुत सख्त गुनाह है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
خَشْيَةَ إِمْلَاقٍ: गरीबी और तंगी के डर से।
خِطْئًا كَبِيرًا: बहुत बड़ा गुनाह और अपराध।
तफसीर:
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब तुम्हें यह मालूम है कि रोज़ी देने वाला अल्लाह ही है, तो अपनी औलाद को गरीबी के डर से क़त्ल मत करो। यह हुक्म उन लोगों के लिए था जो जाहिलियत के दौर में अपनी बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर देते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं वे फ़क़ीर न हो जाएँ। अल्लाह ने उन्हें मना किया और बताया कि रोज़ी देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है। वह तुम्हारी औलाद को भी रोज़ी देगा और तुम्हें भी। जिस तरह वह तुम्हारा रिज़्क़ देता है, उसी तरह वह तुम्हारे बच्चों का भी रिज़्क़ देगा। इसलिए गरीबी के डर से अपनी औलाद को क़त्ल करना बिल्कुल जायज़ नहीं है। यह एक बहुत बड़ा गुनाह है, क्योंकि ये मासूम बच्चे हैं जिन्होंने कोई जुर्म नहीं किया, और न ही उनके क़त्ल की कोई वजह है। यह काम अल्लाह की रहमत से महरूम करने वाला और बहुत बड़ा अपराध है।
फ़ायदे:
यह आयत हमें सिखाती है कि रोज़ी का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है, और उसी पर भरोसा करना चाहिए। जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह हर जानदार को रोज़ी देता है, तो हमें गरीबी का डर नहीं होना चाहिए।
औलाद अल्लाह की अमानत है, और उनकी जान की हिफ़ाज़त करना हमारा फ़र्ज़ है। उन्हें किसी भी हालत में नुक़्सान नहीं पहुँचाना चाहिए।
इस्लाम ज़िंदगी की क़द्र करता है और मासूम बच्चों के क़त्ल को सबसे बड़ा गुनाह करार देता है। यह हमें सिखाता है कि हर इंसान की जान अल्लाह के नज़दीक बहुत कीमती है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि मुश्किल हालात में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, और उसकी रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। अल्लाह हर मुसीबत में रास्ता निकालता है।
और अपने हाथ को न तो गर्दन से बँधा हुआ (बहुत तंग) कर लो (कि किसी को कुछ दो ही नहीं) और न बिल्कुल खोल दो कि सब कुछ दे डालो और आख़िर तुम को मलामत ज़दा हसरत से बैठना पड़े
इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ (बढ़ा) देता है और जिसकी रोज़ी चाहता है तंग रखता है इसमें शक़ नहीं कि वह अपने बन्दों से बहुत बाख़बर और देखभाल रखने वाला है
और (लोगों) मुफलिसी (ग़रीबी) के ख़ौफ से अपनी औलाद को क़त्ल न करो (क्योंकि) उनको और तुम को (सबको) तो हम ही रोज़ी देते हैं बेशक औलाद का क़त्ल करना बहुत सख्त गुनाह है
और जिस जान का मारना ख़ुदा ने हराम कर दिया है उसके क़त्ल न करना मगर जायज़ तौर पर और जो शख़्श नाहक़ मारा जाए तो हमने उसके वारिस को (क़ातिल पर क़सास का क़ाबू दिया है तो उसे चाहिए कि क़त्ल (ख़ून का बदला लेने) में ज्यादती न करे बेशक वह मदद दिया जाएगा
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