अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لا تقربوا: निकट न जाओ, अर्थात् उसके निकट जाने वाले सभी रास्तों और साधनों से दूर रहो।
- الزنا: व्यभिचार, अवैध यौन संबंध।
- فاحشة: अत्यंत बुरा कर्म, वह कार्य जो स्पष्ट रूप से घृणित और लज्जाजनक हो।
- ساء سبيلاً: बहुत बुरा मार्ग, अत्यंत निकृष्ट राह।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में ज़िना (व्यभिचार) से रोकते हुए कहते हैं कि उसके निकट भी मत जाओ। यह आदेश केवल स्वयं ज़िना करने से रोकने के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी चीज़ों से रोकने के लिए है जो ज़िना की ओर ले जाती हैं—जैसे बुरी नज़र, अकेले में मिलना, उत्तेजक बातचीत, अश्लील सामग्री देखना, या ऐसे माहौल में जाना जहाँ यह बुराई फैलती है। यह एक निवारक दृष्टिकोण है, ताकि इंसान धीरे-धीरे उस गुनाह में न पड़ जाए।
फिर अल्लाह बताते हैं कि यह कर्म "फ़ाहिशा" है—अर्थात् अत्यंत घृणित, लज्जाजनक और स्पष्ट रूप से बुरा कार्य है, जिसे अक्ल-समझ रखने वाला हर इंसान बुरा जानता है। यह न केवल दुनिया में बदनामी और शर्मिंदगी का कारण बनता है, बल्कि आख़िरत में भी अल्लाह की यातना का सबब है। इसके अलावा, यह वंश (नस्ल) की पवित्रता को नष्ट करता है, परिवारों को तोड़ता है, और समाज में बीमारियाँ और अराजकता फैलाता है। इसलिए अल्लाह इसे "बुरा मार्ग" कहते हैं—ऐसा रास्ता जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में नुकसान पहुँचाता है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इस्लाम सिर्फ़ गुनाह करने से नहीं रोकता, बल्कि उन रास्तों से भी रोकता है जो गुनाह तक ले जाते हैं। यह एक संपूर्ण नैतिक प्रणाली है जो इंसान की पवित्रता और सम्मान की रक्षा करती है।
- ज़िना से बचना इंसान की इज़्ज़त, परिवार की मज़बूती और समाज की सलामती के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह आदेश हमारी भलाई के लिए है, न कि हम पर बोझ डालने के लिए।
- इस्लाम हमें अपनी नज़र, अपने विचार और अपने कदमों को नियंत्रित करना सिखाता है, ताकि हम पاکیزہ زندگی گزاریں और अल्लाह की रज़ा प्राप्त करें।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हमसे सच्चा प्रेम करता है, इसलिए वह हमें उन चीज़ों से दूर रखता है जो हमारे लिए हानिकारक हैं, और हमें उस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ देता है जो हमें जन्नत और खुशहाली तक पहुँचाता है।
📜 आयत 30-34 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 32
सूरा अल-इसरा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (देखो) ज़िना के पास भी न फटकना क्योंकि बेशक…सूरा आयत 32/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








