मरियम · 17/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَاتَّخَذَتْ مِن دُونِهِمْ حِجَابًا فَأَرْسَلْنَا إِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا ۝١٧
Fattakhazat min doonihim hijaaban fa arsalnaaa ilaihaa roohanaa fatamassala lahaa basharan sawiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर उसने उन लोगों से परदा कर लिया तो हमने अपनी रूह (जिबरील) को उन के पास भेजा तो वह अच्छे ख़ासे आदमी की सूरत बनकर उनके सामने आ खड़ा हुआ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حِجَابًا: पर्दा या आड़।
  • رُوحَنَا: हमारी रूह (आत्मा) — यहाँ अर्थ है जिब्रील अलैहिस्सलाम।
  • فَتَمَثَّلَ: वह प्रकट हुआ / उसका रूप धारण किया।
  • بَشَرًا سَوِيًّا: पूर्ण और सामान्य मानव रूप।

विस्तृत तफ़सीर:

जब मरियम (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार और लोगों से अलग होकर एकांत में इबादत के लिए पर्दा अपना लिया, तो अल्लाह तआला ने अपने फरिश्ते जिब्रील को उनके पास भेजा। जिब्रील अलैहिस्सलाम उनके सामने एक पूर्ण, सुंदर और सामान्य मानव के रूप में प्रकट हुए। यह दृश्य देखकर मरियम (अलैहिस्सलाम) घबरा गईं, क्योंकि वह एक पवित्र और परहेज़गार महिला थीं, और उन्होंने सोचा कि यह व्यक्ति उनके साथ बुराई का इरादा रखता है। लेकिन यह अल्लाह की ओर से एक महान योजना की शुरुआत थी, जिसके माध्यम से ईसा (अलैहिस्सलाम) का जन्म होना था।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है और जब वह किसी काम का फैसला करता है, तो उसे पूरा करके रहता है। मरियम (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता और अल्लाह पर भरोसा ही वह कारण बना कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा मान-सम्मान दिया जो दुनिया की किसी भी महिला को नहीं मिला। यह हमारे लिए सबक है कि जब हम अल्लाह की इबादत के लिए एकांत चुनते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद के लिए अपने फरिश्ते भेजता है, भले ही हमें उसकी योजना का पता न हो।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह के फरिश्ते उसके आदेश से इंसानी रूप धारण कर सकते हैं, और यह अल्लाह की कुदरत का एक नमूना है। हमें चाहिए कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। मरियम (अलैहिस्सलाम) की तरह हम भी अपने जीवन में पवित्रता और अल्लाह की इबादत को अपनाएं, तो अल्लाह हमें भी ऐसे ही सम्मान और बरकत से नवाजेगा।



📜 आयत 15-19 — मरियम

15وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا
और (हमारी तरफ से) उन पर (बराबर) सलाम है जिस दिन पैदा हुए और जिस दिन मरेंगे और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा खड़े किए जाएँगे
16وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مَرْيَمَ إِذِ انتَبَذَتْ مِنْ أَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में मरियम का भी तज़किरा करो कि जब वह अपने लोगों से अलग होकर पूरब की तरफ़ वाले मकान में (गुस्ल के वास्ते) जा बैठें
17فَاتَّخَذَتْ مِن دُونِهِمْ حِجَابًا فَأَرْسَلْنَا إِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا
फिर उसने उन लोगों से परदा कर लिया तो हमने अपनी रूह (जिबरील) को उन के पास भेजा तो वह अच्छे ख़ासे आदमी की सूरत बनकर उनके सामने आ खड़ा हुआ
18قَالَتْ إِنِّي أَعُوذُ بِالرَّحْمَٰنِ مِنكَ إِن كُنتَ تَقِيًّا
(वह उसको देखकर घबराई और) कहने लगी अगर तू परहेज़गार है तो मैं तुझ से खुदा की पनाह माँगती हूँ
19قَالَ إِنَّمَا أَنَا رَسُولُ رَبِّكِ لِأَهَبَ لَكِ غُلَامًا زَكِيًّا
(मेरे पास से हट जा) जिबरील ने कहा मैं तो साफ़ तुम्हारे परवरदिगार का पैग़मबर (फ़रिश्ता) हूँ ताकि तुमको पाक व पाकीज़ा लड़का अता करूँ
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — मरियम 17

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Tuesday, August 18, 2026

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