मरियम · 38/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٣٨
Asmi` bihim wa absir Yawma yaatoonanaa laakiniz zaalimoonal yawma fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन ये लोग हमारे हुज़ूर में हाज़िर होंगे क्या कुछ सुनते देखते होंगे मगर आज तो नफ़रमान लोग खुल्लम खुल्ला गुमराही में हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ: यानी उनका सुनना और देखना कितना तेज़ होगा! यहाँ यह अचरज और हैरत के अंदाज़ में कहा गया है।
  • يَوْمَ يَأْتُونَنَا: उस दिन जब वे हमारे सामने हाज़िर होंगे (यानी क़ियामत के दिन)।
  • الظَّالِمُونَ: ज़ालिम लोग, यानी काफ़िर और मुशरिक।
  • ضَلَالٍ مُبِينٍ: साफ़ और खुली गुमराही, हक़ से भटकाव।

तफ़सीर:

क़ियामत का दिन कितना हैरतअंगेज़ होगा! जब ये ज़ालिम लोग अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे, तो उनके कान और आँखें कितनी तेज़ हो जाएँगी — वे सब कुछ सुनेंगे और देखेंगे जो आज नहीं सुनते और नहीं देखते। लेकिन अफ़सोस! यह सुनना और देखना उस वक़्त उनके किसी काम नहीं आएगा, क्योंकि यह इम्तिहान का वक़्त नहीं होगा, बल्कि सज़ा और हिसाब का दिन होगा। वे उस दिन वो हक़ीक़तें देख लेंगे जिन्हें दुनिया में झुठलाते थे — जन्नत, जहन्नम, हिसाब, और अल्लाह की अज़मत — लेकिन यह देखना उन्हें नुक़्सान से नहीं बचा सकेगा।

मगर आज, इस दुनिया में, यही ज़ालिम लोग साफ़ गुमराही में पड़े हुए हैं। वे हक़ को छोड़कर बातिल पर चल रहे हैं, और अपनी इस गुमराही को महसूस भी नहीं करते। वे आख़िरत की तैयारी नहीं करते, और अचानक उन पर क़ियामत आ जाएगी, जबकि वे अपने ज़ुल्म और गुनाहों पर ही होंगे।


दावती पहलू:

यह आयत हमें बड़ी सीख देती है — आज हमारे पास आँखें और कान हैं, हम देख और सुन सकते हैं। यह अल्लाह की बड़ी नेमत है। काश! हम इन नेमतों को हक़ की राह में इस्तेमाल करें — क़ुरआन सुनें, अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करें, और सच्चाई को देखें। क़ियामत के दिन यही आँखें और कान हमारे ख़िलाफ़ गवाही देंगे। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सही कर लें, क्योंकि आज का दिन अमल का दिन है, और कल का दिन सिर्फ़ हिसाब का दिन होगा। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 36-40 — मरियम

36وَإِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (ही) मेरा (भी) परवरदिगार है और तुम्हारा (भी) परवरदिगार है तो सब के सब उसी की इबादत करो यही (तौहीद) सीधा रास्ता है
37فَاخْتَلَفَ الْأَحْزَابُ مِن بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن مَّشْهَدِ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(और यही दीन ईसा लेकर आए थे) फिर (काफिरों के) फ़िरकों ने बहम एख़तेलाफ किया तो जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तियार किया उनके लिए बड़े (सख्त दिन खुदा के हुज़ूर) हाज़िर होने से ख़राबी है
38أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
जिस दिन ये लोग हमारे हुज़ूर में हाज़िर होंगे क्या कुछ सुनते देखते होंगे मगर आज तो नफ़रमान लोग खुल्लम खुल्ला गुमराही में हैं
39وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الْأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम उनको हसरत (अफ़सोस) के दिन से डराओ जब क़तई फैसला कर दिया जाएगा और (इस वक्त तो) ये लोग ग़फलत में (पड़े हैं)
40إِنَّا نَحْنُ نَرِثُ الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا وَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
और ईमान नहीं लाते इसमें शक नहीं कि (एक दिन) ज़मीन के और जो कुछ उस पर है (उसके) हम ही वारिस होंगे
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अनुवाद — मरियम 38

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Tuesday, August 18, 2026

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