मरियम · 39/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الْأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٣٩
Wa anzirhum Yawmal hasrati iz qudiyal amr; wa hum fee ghaflatinw wa hum laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उनको हसरत (अफ़सोस) के दिन से डराओ जब क़तई फैसला कर दिया जाएगा और (इस वक्त तो) ये लोग ग़फलत में (पड़े हैं)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • यौमुल हसरत (يوم الحسرة): पछतावे और अफसोस का दिन, यानी क़ियामत का दिन।
  • क़ुज़ियल अम्र (قضي الأمر): फ़ैसला कर दिया जाएगा, मामला तय कर दिया जाएगा।
  • ग़फ़्लत (غفلة): बेखबरी, लापरवाही, भूल-चूक।
  • ला यु'मिनून (لا يؤمنون): ईमान नहीं लाते, विश्वास नहीं करते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों को उस दिन से डराएँ, जो पछतावे और अफसोस का दिन होगा — यानी क़ियामत का दिन। उस दिन हर शख्स अपने किए पर पछताएगा। गुनाहगार इस बात पर अफसोस करेगा कि उसने गुनाह क्यों किए, और नेक इंसान इस बात पर कि उसने और ज़्यादा नेकियाँ क्यों नहीं कमाईं। उस दिन फ़ैसला सुना दिया जाएगा, हिसाब पूरा हो जाएगा, और हर इंसान अपने अंजाम तक पहुँच जाएगा — ईमानवाले जन्नत में और काफिर जहन्नम में। मौत को एक सफेद मेंढे की शक्ल में लाया जाएगा और उसे ज़ब्ह कर दिया जाएगा, ताकि हमेशा की ज़िंदगी शुरू हो जाए।

और ये लोग आज इस दुनिया में इस दिन से बिल्कुल बेखबर हैं, अपनी ख्वाहिशों और दुनियावी मामलों में लगे हुए हैं। वे इस पर ईमान नहीं रखते, न इसकी तैयारी करते हैं, न अच्छे काम करते हैं। उनकी यही ग़फ़्लत और नाफ़रमानी उस दिन उनके लिए सबसे बड़ा पछतावा बनेगी।


दावती पहलू (नसीहत):

ऐ अल्लाह के बंदो! यह दिन आने से पहले ही जाग जाओ। यह मौका हाथ से न जाने दो। आज जो तुम बेखबर हो, कल उस दिन पछताओगे, लेकिन पछतावा किसी काम न आएगा। आज ईमान लाओ, अच्छे काम करो, अल्लाह से माफ़ी माँगो। अल्लाह बड़ा मेहरबान और क्षमाशील है — वह चाहता है कि तुम उसकी तरफ लौट आओ। उस दिन का डर आज ही दिल में बिठा लो, ताकि कल तुम्हें पछताना न पड़े। जो आज सीधे रास्ते पर चलेगा, उस दिन उसकी आँखें ठंडी होंगी और वह जन्नत की नेमतों में हमेशा रहेगा। अल्लाह तआला हम सबको उस दिन की तैयारी की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 37-41 — सूरा मरियम

37فَاخْتَلَفَ الْأَحْزَابُ مِن بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن مَّشْهَدِ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(और यही दीन ईसा लेकर आए थे) फिर (काफिरों के) फ़िरकों ने बहम एख़तेलाफ किया तो जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तियार किया उनके लिए बड़े (सख्त दिन खुदा के हुज़ूर) हाज़िर होने से ख़राबी है
38أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَٰكِنِ الظَّالِمُونَ الْيَوْمَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
जिस दिन ये लोग हमारे हुज़ूर में हाज़िर होंगे क्या कुछ सुनते देखते होंगे मगर आज तो नफ़रमान लोग खुल्लम खुल्ला गुमराही में हैं
39وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الْأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम उनको हसरत (अफ़सोस) के दिन से डराओ जब क़तई फैसला कर दिया जाएगा और (इस वक्त तो) ये लोग ग़फलत में (पड़े हैं)
40إِنَّا نَحْنُ نَرِثُ الْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا وَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
और ईमान नहीं लाते इसमें शक नहीं कि (एक दिन) ज़मीन के और जो कुछ उस पर है (उसके) हम ही वारिस होंगे
41وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِبْرَاهِيمَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
(और सब नेस्त व नाबूद हो जाएँगे) और सब के सब हमारी तरफ़ लौटाए जाएँगे और (ऐ रसूल) क़ुरान में इबराहीम का (भी) तज़किरा करो
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — मरियम 39

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Friday, October 2, 2026

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