मरियम · 53/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَوَهَبْنَا لَهُ مِن رَّحْمَتِنَا أَخَاهُ هَارُونَ نَبِيًّا ۝٥٣
Wa wahabnaa lahoo mir rahmatinaaa akhaahu Haaroona Nabiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उन्हें अपनी ख़ास मेहरबानी से उनके भाई हारून को (उनका वज़ीर बनाकर) इनायत फ़रमाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَوَهَبْنَا: हमने (अल्लाह ने) दिया / प्रदान किया।
  • مِن رَّحْمَتِنَا: अपनी विशेष दया और कृपा से।
  • أَخَاهُ هَارُونَ: उसका भाई हारून।
  • نَبِيًّا: नबी (पैग़म्बर) बनाकर।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) पर बड़ा अनुग्रह किया और उनकी दुआ को क़बूल करते हुए उन्हें एक बड़ी नेमत अता की। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) को फ़िरऔन के पास जाने का हुक्म हुआ, तो उन्होंने अपने रब से दुआ की कि मेरे भाई हारून को मेरा सहायक बना दे, ताकि वह मेरी बात को मज़बूत करे और इस कठिन काम में मेरा साथ दे। अल्लाह ने उनकी यह दुआ क़बूल फ़रमाई और अपनी असीम रहमत से उनके भाई हारून को नबी बनाकर उनका सहायक बना दिया।

यह अल्लाह की विशेष कृपा थी कि उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उनके भाई को भी नबूवत का शरीफ़ मर्तबा देकर उनका साथी और मददगार बनाया। हारून (अलैहिस्सलाम) अपने भाई की बात को मज़बूत करते थे, उनके साथ मिलकर लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाते थे और फ़िरऔन के सामने सच्चाई पेश करने में उनका पूरा साथ देते थे। यह इस बात का सबूत है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ता।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह से दुआ करना कितनी बड़ी नेमत है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जो माँगा, अल्लाह ने उसे उससे बेहतर अंदाज़ में अता किया। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़रूरतों के लिए अल्लाह ही से दुआ करें, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है और अपने बंदों पर बड़ी रहमत करने वाला है। यह आयत मुसलमानों के लिए इस बात की तरग़ीब है कि वे अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। अल्लाह की रहमत का दामन बहुत विस्तृत है, और वह अपने नेक बंदों को ऐसे तरीक़ों से मदद पहुँचाता है जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता।



📜 आयत 51-55 — सूरा मरियम

51وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَىٰ ۚ إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में (कुछ) मूसा का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह (मेरा) बन्दा और साहिबे किताब व शरीयत नबी था
52وَنَادَيْنَاهُ مِن جَانِبِ الطُّورِ الْأَيْمَنِ وَقَرَّبْنَاهُ نَجِيًّا
और हमने उनको (कोहे तूर) की दाहिनी तरफ़ से आवाज़ दी और हमने उन्हें राज़ व नियाज़ की बातें करने के लिए अपने क़रीब बुलाया
53وَوَهَبْنَا لَهُ مِن رَّحْمَتِنَا أَخَاهُ هَارُونَ نَبِيًّا
और हमने उन्हें अपनी ख़ास मेहरबानी से उनके भाई हारून को (उनका वज़ीर बनाकर) इनायत फ़रमाया
54وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا
(ऐ रसूल) कुरान में इसमाईल का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह वायदे के सच्चे थे और भेजे हुए पैग़म्बर थे
55وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُ بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِ مَرْضِيًّا
और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — मरियम 53

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Thursday, October 1, 2026

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