मरियम · 78/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
أَطَّلَعَ الْغَيْبَ أَمِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا ۝٧٨
Attala`al ghaiba amitta khaza`indar Rahmaani `ahdaa
📖 हिंदी अर्थ
क्या उसे ग़ैब का हाल मालूम हो गया है या उसने खुदा से कोई अहद (व पैमान) ले रखा है हरग़िज नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَطَّلَعَ الْغَيْبَ: क्या उसने ग़ैब (छिपी हुई बात) को जान लिया या उस पर नज़र डाल ली?
  • عَهْدًا: वादा या प्रतिज्ञा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति की निंदा में उतरी है जो यह दावा करता था कि उसे आख़िरत में धन और संतान मिलेंगे। अल्लाह तआला इस पर प्रश्नवाचक अंदाज़ में फ़रमाता है: क्या उस व्यक्ति ने ग़ैब (छिपे हुए ज्ञान) को देख लिया है कि वह ऐसी बातें कर रहा है? यानी क्या उसे लौह-ए-महफ़ूज़ का ज्ञान प्राप्त है कि वह निश्चित रूप से कह रहा है कि उसे यह सब मिलेगा? या फिर उसने रहमान (अल्लाह) से कोई वादा ले लिया है कि उसे ये चीज़ें दी जाएंगी?

यह आयत उन लोगों की बात का खंडन करती है जो बिना किसी प्रमाण के आख़िरत के बारे में झूठे दावे करते हैं। अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह के पास है, और कोई व्यक्ति उसके पास से कोई वादा प्राप्त किए बिना ऐसी बातें नहीं कह सकता। यह उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो अल्लाह पर झूठ बांधते हैं या उसके बारे में बिना ज्ञान के बातें करते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में केवल अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उससे ही अपनी आवश्यकताओं की माँग करनी चाहिए। अल्लाह रहमान है, दयालु है, और वह अपने बंदों को उनकी नेकियों के अनुसार पुरस्कृत करता है। हमें कभी भी बिना प्रमाण के झूठे दावे नहीं करने चाहिए, बल्कि अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और उसकी रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए। याद रखें, अल्लाह ने हमें क़ुरआन और सुन्नत के माध्यम से सच्चा रास्ता दिखाया है, और जो कोई इस पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह से सच्चा वादा यह है कि वह अपने नेक बंदों को जन्नत से नवाज़ेगा, और यह वादा उसने अपनी रहमत से किया है।



📜 आयत 76-80 — सूरा मरियम

76وَيَزِيدُ اللَّهُ الَّذِينَ اهْتَدَوْا هُدًى ۗ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ مَّرَدًّا
और जो लोग राहे रास्त पर हैं खुदा उनकी हिदायत और ज्यादा करता जाता है और बाक़ी रह जाने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब की राह से भी बेहतर है और अन्जाम के ऐतबार से (भी) बेहतर है
77أَفَرَأَيْتَ الَّذِي كَفَرَ بِآيَاتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالًا وَوَلَدًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उस शख्स पर भी नज़र की जिसने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगा कि (अगर क़यामत हुईतो भी) मुझे माल और औलाद ज़रूर मिलेगी
78أَطَّلَعَ الْغَيْبَ أَمِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا
क्या उसे ग़ैब का हाल मालूम हो गया है या उसने खुदा से कोई अहद (व पैमान) ले रखा है हरग़िज नहीं
79كَلَّا ۚ سَنَكْتُبُ مَا يَقُولُ وَنَمُدُّ لَهُ مِنَ الْعَذَابِ مَدًّا
जो कुछ ये बकता है (सब) हम सभी से लिखे लेते हैं और उसके लिए और ज्यादा अज़ाब बढ़ाते हैं
80وَنَرِثُهُ مَا يَقُولُ وَيَأْتِينَا فَرْدًا
और वो माल व औलाद की निस्बत बक रहा है हम ही उसके मालिक हो बैठेंगे और ये हमारे पास तनहा आयेगा
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
78आयत

अनुवाद — मरियम 78

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Saturday, October 3, 2026

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