मरियम · 84/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
فَلَا تَعْجَلْ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّمَا نَعُدُّ لَهُمْ عَدًّا ۝٨٤
Falaa ta`jal alaihim innamaa na `uddu lahum `addaa
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम उन काफिरों पर (नुज़ूले अज़ाब की) जल्दी न करो हम तो बस उनके लिए (अज़ाब) का दिन गिन रहे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَا تَعْجَلْ عَلَيْهِمْ: उन पर जल्दी न करें (अर्थात उनके लिए अज़ाब में जल्दी न माँगें)।
  • نَعُدُّ لَهُمْ عَدًّا: हम उनके लिए गिनती कर रहे हैं, एक पूरी गिनती (अर्थात उनकी साँसों, उम्र और आयु की गिनती)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन काफ़िरों पर अज़ाब लाने की जल्दी न करें, और न ही उनके विनाश की कामना में जल्दबाज़ी दिखाएँ। यह आपके लिए धैर्य और सब्र का आदेश है, क्योंकि अल्लाह तआला ने उनकी मुहलत को एक निश्चित समय तक मुक़र्रर किया है। वह उनकी उम्रों, साँसों, और आमाल (कर्मों) को शुमार कर रहा है—हर लम्हा, हर साँस, हर क़दम उसके इल्म में है। यह गिनती न तो कम होती है और न ज़्यादा; जब यह मुकम्मल हो जाएगी, तो उन्हें उनके किए का पूरा बदला मिलेगा, बिना किसी देरी के।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में सब्र करना चाहिए। कभी-कभी हम देखते हैं कि बुराई करने वाले फल-फूल रहे हैं, लेकिन यह अल्लाह की ओर से उन्हें दी गई मुहलत है। अल्लाह न्यायपूर्ण है और हर चीज़ का हिसाब रखता है। उसकी गिनती में कोई भूल नहीं होती, और उसका फैसला सबसे बेहतर है। इसलिए हमें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी योजना पर यक़ीन करना चाहिए।

यह भी एक इंसाफ़ की बात है कि अल्लाह हर इंसान को उसकी मुहलत पूरी करने का मौक़ा देता है, ताकि वह तौबा कर सके या अपने कर्मों का सबूत पूरा कर सके। लेकिन जब समय आएगा, तो अल्लाह का अज़ाब आएगा, और कोई उसे टाल नहीं सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अच्छे कर्मों से भरें, क्योंकि हमारी भी गिनती हो रही है, और हमें अपने रब के सामने हाज़िर होना है।



📜 आयत 82-86 — सूरा मरियम

82كَلَّا ۚ سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا
(बल्कि) वह माबूद खुद उनकी इबादत से इन्कार करेंगे और (उल्टे) उनके दुशमन हो जाएँगे
83أَلَمْ تَرَ أَنَّا أَرْسَلْنَا الشَّيَاطِينَ عَلَى الْكَافِرِينَ تَؤُزُّهُمْ أَزًّا
(ऐ रसूल) क्या तुमने इसी बात को नहीं देखा कि हमने शैतान को काफ़िरों पर छोड़ रखा है कि वह उन्हें बहकाते रहते हैं
84فَلَا تَعْجَلْ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّمَا نَعُدُّ لَهُمْ عَدًّا
तो (ऐ रसूल) तुम उन काफिरों पर (नुज़ूले अज़ाब की) जल्दी न करो हम तो बस उनके लिए (अज़ाब) का दिन गिन रहे हैं
85يَوْمَ نَحْشُرُ الْمُتَّقِينَ إِلَى الرَّحْمَٰنِ وَفْدًا
कि जिस दिन परहेज़गारों को (खुदाए) रहमान के (अपने) सामने मेहमानों की तरह तरह जमा करेंगे
86وَنَسُوقُ الْمُجْرِمِينَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ وِرْدًا
और गुनेहगारों को जहन्नुम की तरफ प्यासे (जानवरो की तरह हकाँएगे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
84आयत

अनुवाद — मरियम 84

सूरा मरियम आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम उन काफिरों पर (नुज़ूले अज़ाब की)…

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Thursday, October 1, 2026

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