Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَهْرَةً (जहरतन): खुल्लम-खुल्ला, आँखों से देखना, बिना किसी आड़ या परदे के।
- الصَّاعِقَةُ (अस-साइक़ा): आकाशीय बिजली, भयानक चीख़ या आग का वह पत्थर जो आसमान से गिरकर विनाश कर देता है। यहाँ इसका अर्थ मृत्यु का दंड भी लिया गया है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बनी इसराइल को उनके उस कृत्य की याद दिलाता है जब उन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से बड़ी धृष्टता और गुस्ताख़ी के साथ कहा था: "हम आपकी बात कभी नहीं मानेंगे और न ही आपको सच्चा मानेंगे, जब तक कि हम अल्लाह को खुल्लम-खुल्ला अपनी आँखों से न देख लें।" वे चाहते थे कि अल्लाह का दीदार उन्हें सीधे हो जाए, जो इस दुनिया में किसी इंसान के लिए संभव नहीं है। उनकी इसी जिद और बेअदबी की सज़ा में अल्लाह ने उन पर आकाशीय बिजली (या आग) भेजी, जिसने उन्हें उसी वक़्त जला दिया या मौत के घाट उतार दिया, और यह सब कुछ वे अपनी आँखों से देख रहे थे। यानी जब वे आपस में एक-दूसरे को देख रहे थे और उनकी मौत का मंज़र सामने था, उसी हालत में अल्लाह का अज़ाब आया। यह उनकी ज़िद और अल्लाह के साथ बेअदबी की सज़ा थी, ताकि वे जान लें कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे किसी को ज़बरदस्ती या जिद की इजाज़त नहीं।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह से बंदे को अपनी जगह का एहसास रखना चाहिए। उसकी नाफ़रमानी या उसके साथ बेअदबी करना बहुत बड़ा गुनाह है, जिसकी सज़ा दुनिया में भी मिल सकती है।
- अल्लाह के नबियों की बात बिना किसी शर्त के माननी चाहिए। नबी की रिसालत पर ईमान लाने के लिए ऐसी चीज़ें माँगना जो अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) के खिलाफ हों, सिर्फ ज़िद और हठ है, जो इंसान को हलाकत में डाल सकती है।
- अल्लाह की क़ुदरत और उसका अज़ाब बहुत तेज़ है। जब वह किसी क़ौम को पकड़ता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह से डरकर ज़िंदगी गुज़ारे और उसके हुक्मों को पूरे दिल से क़बूल करे।
- यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह से दुआ और गुज़ारिश में अदब और इन्कसारी होनी चाहिए। अल्लाह से दीदार की आरज़ू जन्नत में रखी जाए, दुनिया में नहीं, क्योंकि दुनिया में उसका दीदार किसी के लिए मुमकिन नहीं और न ही इसकी माँग करनी चाहिए।
- अल्लाह का क़ुरआन हमें बनी इसराइल के हालात से आगाह करता है ताकि हम उनकी गलतियों से सबक़ लें और उन रास्तों पर न चलें जिन पर चलकर वे अल्लाह के अज़ाब के शिकार हुए।
📜 आयत 53-57 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 55
सूरा अल-बकरा आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (वह वक्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से…सूरा आयत 55/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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