ताहा · 117/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
فَقُلْنَا يَا آدَمُ إِنَّ هَٰذَا عَدُوٌّ لَّكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ الْجَنَّةِ فَتَشْقَىٰ ۝١١٧
Faqulnaa yaaa Aadamu inna haazaa `aduwwul laka wa lizawjika falaa yukhrijan nakumaa minal Jannati fatashqaa
📖 हिंदी अर्थ
तो मैंने (आदम से कहा) कि ऐ आदम ये यक़ीनी तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुशमन है तो कहीं तुम दोनों को बेहिश्त से निकलवा न छोड़े तो तुम (दुनिया की) मुसीबत में फँस जाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَدُوٌّ – शत्रु
  • لَكَ وَلِزَوْجِكَ – तुम्हारे और तुम्हारी पत्नी के लिए
  • فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا – वह तुम दोनों को न निकाल दे
  • فَتَشْقَى – तो तुम मुश्किल और तकलीफ में पड़ जाओगे

तफसीर:

अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत में रखने के बाद उन्हें साफ़ और स्पष्ट चेतावनी दी कि ऐ आदम! ये इब्लीस तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी हव्वा का खुला दुश्मन है। ये कोई साधारण दुश्मनी नहीं, बल्कि ये तुम दोनों को जन्नत से निकलवाने की कोशिश में लगा हुआ है। अल्लाह ने उन्हें आगाह किया कि इसके बहकावे में मत आना, इसकी बात मत मानना, क्योंकि अगर तुमने इसकी बात मान ली तो ये तुम्हें जन्नत से निकलवा देगा और फिर तुम दुनिया की मुश्किलों, मेहनत-मशक्कत और तकलीफों में पड़ जाओगे।

यहाँ अल्लाह ने खास तौर पर आदम अलैहिस्सलाम से कहा "فَتَشْقَى" (तो तुम मुश्किल में पड़ जाओगे), क्योंकि दुनिया में रोज़ी-रोटी कमाने, खाने-पीने, पहनने और दूसरी ज़रूरतों के लिए मेहनत करने की ज़िम्मेदारी आम तौर पर मर्दों पर होती है। ये एक बड़ी रहमत और नेमत है कि अल्लाह ने अपने नबी को दुश्मन की पहचान करा दी, ताकि वो उसके धोखे से बच सकें।

इस आयत से हमें ये सबक मिलता है कि शैतान इंसान का सबसे पुराना और पक्का दुश्मन है। जिस तरह अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम को दुश्मन से आगाह किया, उसी तरह हमें भी शैतान के हथकंडों से बचकर रहना चाहिए। शैतान हमें भी जन्नत की नेमतों से दूर करने की कोशिश करता है, लेकिन अल्लाह की बताई हुई राह पर चलकर हम उसके धोखे से महफूज़ रह सकते हैं। ये अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें कुरआन में शैतान की चालों से आगाह किया है, ताकि हम उसके जाल में न फँसें और जन्नत की कामयाबी हासिल कर सकें।



📜 आयत 115-119 — सूरा ताहा

115وَلَقَدْ عَهِدْنَا إِلَىٰ آدَمَ مِن قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُ عَزْمًا
और हमने आदम से पहले ही एहद ले लिया था कि उस दरख्त के पास न जाना तो आदम ने उसे तर्क कर दिया
116وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ
और हमने उनमें साबित व इस्तक़लाल न पाया और जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो तो सबने सजदा किया मगर शैतान ने इन्कार किया
117فَقُلْنَا يَا آدَمُ إِنَّ هَٰذَا عَدُوٌّ لَّكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ الْجَنَّةِ فَتَشْقَىٰ
तो मैंने (आदम से कहा) कि ऐ आदम ये यक़ीनी तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुशमन है तो कहीं तुम दोनों को बेहिश्त से निकलवा न छोड़े तो तुम (दुनिया की) मुसीबत में फँस जाओ
118إِنَّ لَكَ أَلَّا تَجُوعَ فِيهَا وَلَا تَعْرَىٰ
कुछ शक नहीं कि (बेहिश्त में) तुम्हें ये आराम है कि न तो तुम यहाँ भूके रहोगे और न नँगे
119وَأَنَّكَ لَا تَظْمَأُ فِيهَا وَلَا تَضْحَىٰ
और न यहाँ प्यासे रहोगे और न धूप खाओगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
117आयत

अनुवाद — ताहा 117

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Saturday, October 3, 2026

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