ताहा · 51/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُونِ الْأُولَىٰ ۝٥١
Qaala famaa baalul quroonil oolaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर उसी ने ज़िन्दगी बसर करने के तरीक़े बताए फिरऔन ने पूछा भला अगले लोगों का हाल (तो बताओ) कि क्या हुआ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَالُ – हाल, अवस्था, मामला
  • الْقُرُونِ – क़ुरून, युग, ज़माने, पिछली उम्मतें (बहुवचन)
  • الْأُولَىٰ – पहले के, पिछले, गुज़रे हुए

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत दी और उसे अल्लाह की तरफ़ बुलाया, तो फ़िरऔन ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक़ सवालात करने शुरू कर दिए। उसने कहा: "फिर उन पिछली उम्मतों का क्या हाल है?" यानी उन क़ौमों का क्या अंजाम हुआ जो हमसे पहले गुज़र चुकी हैं? जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और कुफ़्र पर क़ायम रहीं? क्या वे भी तेरी दावत के दायरे में आएँगी? और उनका हिसाब क्या होगा?

फ़िरऔन का यह सवाल दरअसल टालमटोल और हक़ से भागने की कोशिश थी। वह सीधे सच को क़बूल करने के बजाय बेकार के सवालात पूछ रहा था, ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) को उलझा सके। लेकिन इस सवाल में भी उसकी नादानी ज़ाहिर थी, क्योंकि वह यह भूल गया कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — चाहे वह पिछली उम्मतें हों या आने वाली नस्लें।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि जब इंसान हक़ को नहीं मानना चाहता, तो वह ऐसे सवाल उठाता है जो असल मुद्दे से हटकर हों। मगर एक मोमिन का काम है कि वह दावत में डटा रहे और जवाब अल्लाह की तरफ़ से दिए गए इल्म के साथ दे। यह भी याद रखें कि अल्लाह तआला हर ज़माने और हर उम्मत के हाल से बाख़बर है, और क़यामत के दिन हर गुज़रे हुए इंसान से उसके आमाल का हिसाब लिया जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, क्योंकि हमारा रब कभी किसी को ज़ुल्म नहीं करता और न ही किसी का अमल उससे छिपा है।



📜 आयत 49-53 — सूरा ताहा

49قَالَ فَمَن رَّبُّكُمَا يَا مُوسَىٰ
और उसके हुक्म से मुँह मोड़े (ग़रज़ गए और कहा) फिरऔन ने पूछा ऐ मूसा आख़िर तुम दोनों का परवरदिगार कौन है
50قَالَ رَبُّنَا الَّذِي أَعْطَىٰ كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدَىٰ
मूसा ने कहा हमारा परवरदिगार वह है जिसने हर चीज़ को उसके (मुनासिब) सूरत अता फरमाई
51قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُونِ الْأُولَىٰ
फिर उसी ने ज़िन्दगी बसर करने के तरीक़े बताए फिरऔन ने पूछा भला अगले लोगों का हाल (तो बताओ) कि क्या हुआ
52قَالَ عِلْمُهَا عِندَ رَبِّي فِي كِتَابٍ ۖ لَّا يَضِلُّ رَبِّي وَلَا يَنسَى
मूसा ने कहा इन बातों का इल्म मेरे परवरदिगार के पास एक किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है मेरा परवरदिगार न बहकता है न भूलता है
53الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّن نَّبَاتٍ شَتَّىٰ
वह वही है जिसने तुम्हारे (फ़ायदे के) वास्ते ज़मीन को बिछौना बनाया और तुम्हारे लिए उसमें राहें निकाली और उसी ने आसमान से पानी बरसाया फिर (खुदा फरमाता है कि) हम ही ने उस पानी के ज़रिए से मुख्तलिफ़ क़िस्मों की घासे निकाली
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
51आयत

अनुवाद — ताहा 51

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Saturday, October 3, 2026

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