ताहा · 50/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
قَالَ رَبُّنَا الَّذِي أَعْطَىٰ كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدَىٰ ۝٥٠
Qaala Rabbunal lazeee a`taa kulla shai`in khalqahoo summa hadaa
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा हमारा परवरदिगार वह है जिसने हर चीज़ को उसके (मुनासिब) सूरत अता फरमाई

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَلْقَهُ: उसकी रचना, आकृति, स्वरूप और बनावट।
  • هَدَى: मार्गदर्शन किया, रास्ता दिखाया, उपयोग का तरीका सिखाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से पूछा कि तुम्हारा रब कौन है, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उसे ऐसा उत्तर दिया जो उसके सीमित दिमाग से कहीं ऊपर था। उन्होंने कहा: "हमारा रब वह है जिसने हर चीज़ को उसकी रचना प्रदान की, फिर मार्गदर्शन किया।"

यानी अल्लाह तआला ने हर मख़लूक़ (प्राणी) को उसका विशेष स्वरूप, आकार और संरचना दी है — जो उसके लिए सबसे उपयुक्त है। चाहे वह इंसान हो, जानवर हो, पेड़-पौधे हों या पानी और हवा — हर चीज़ को उसकी अपनी ख़ास बनावट दी गई है। फिर उसके बाद अल्लाह ने हर मख़लूक़ को यह भी सिखाया कि वह अपनी इस रचना का उपयोग कैसे करे। जैसे मधुमक्खी को शहद बनाने का तरीका, पक्षी को घोंसला बनाने का तरीका, इंसान को खेती करने और ज़मीन से फ़ायदा उठाने का तरीका — सब कुछ अल्लाह की ओर से दिया गया मार्गदर्शन है।

यह आयत हमें अल्लाह की रबूबियत (पालनहार होने) की सबसे बड़ी निशानी बताती है। जिस रब ने हर चीज़ को उसकी ज़रूरत के मुताबिक बनाया और फिर उसे उपयोग का तरीका भी सिखाया — वही सच्चा पालनहार है। यही वह सच्चाई है जो फ़िरऔन जैसे घमंडी को भी चुप करा सकती है, क्योंकि यह तर्क दिल और दिमाग दोनों को संतुष्ट करता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला ने हमें जो कुछ भी दिया है — चाहे वह शारीरिक क्षमताएँ हों, बुद्धि हो, या दुनिया के साधन — वह सब बेकार नहीं है। अल्लाह ने हर चीज़ का सही उपयोग सिखाया है। हमें चाहिए कि हम अपनी इन नेमतों को अल्लाह की बताई हुई राह में इस्तेमाल करें, और उसके दिए हुए मार्गदर्शन (क़ुरआन और सुन्नत) को अपनाएँ। जिसने हमें बनाया और सिखाया, उसी की बताई हुई राह पर चलना ही हमारी कामयाबी है।



📜 आयत 48-52 — ताहा

48إِنَّا قَدْ أُوحِيَ إِلَيْنَا أَنَّ الْعَذَابَ عَلَىٰ مَن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
हमारे पास खुदा की तरफ से ये ''वही'' नाज़िल हुईहै कि यक़ीनन अज़ाब उसी शख्स पर है जो (खुदा की आयतों को) झुठलाए
49قَالَ فَمَن رَّبُّكُمَا يَا مُوسَىٰ
और उसके हुक्म से मुँह मोड़े (ग़रज़ गए और कहा) फिरऔन ने पूछा ऐ मूसा आख़िर तुम दोनों का परवरदिगार कौन है
50قَالَ رَبُّنَا الَّذِي أَعْطَىٰ كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدَىٰ
मूसा ने कहा हमारा परवरदिगार वह है जिसने हर चीज़ को उसके (मुनासिब) सूरत अता फरमाई
51قَالَ فَمَا بَالُ الْقُرُونِ الْأُولَىٰ
फिर उसी ने ज़िन्दगी बसर करने के तरीक़े बताए फिरऔन ने पूछा भला अगले लोगों का हाल (तो बताओ) कि क्या हुआ
52قَالَ عِلْمُهَا عِندَ رَبِّي فِي كِتَابٍ ۖ لَّا يَضِلُّ رَبِّي وَلَا يَنسَى
मूसा ने कहा इन बातों का इल्म मेरे परवरदिगार के पास एक किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है मेरा परवरदिगार न बहकता है न भूलता है
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अनुवाद — ताहा 50

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सूरा आयत 50/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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