ताहा · 78/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِهِ فَغَشِيَهُم مِّنَ الْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْ ۝٧٨
Fa atba`ahum Fir`awnu bijunoodihee faghashiyahum minal yammmi maa ghashi yahum
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ फिरऔन ने अपने लशकर समैत उनका पीछा किया फिर दरिया (के पानी का रेला) जैसा कुछ उन पर छाया गया वह छा गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَتْبَعَهُمْ: फिर उनका पीछा किया।
  • بِجُنُودِهِ: अपनी सेना के साथ।
  • فَغَشِيَهُمْ: फिर उन्हें ढक लिया।
  • مِنَ الْيَمِّ: समुद्र (पानी) में से।
  • مَا غَشِيَهُمْ: जो चीज़ उन्हें ढक गई (यानी वह विनाशकारी पानी जिसकी हकीकत अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे बनी इसराइल को लेकर रातों-रात मिस्र से निकल जाएँ, तो हज़रत मूसा ने अपनी क़ौम को लेकर समुद्र की ओर रुख़ किया। अल्लाह के हुक्म से समुद्र फट गया और रास्ता बन गया, और मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के साथ सुरक्षित पार निकल गए।

लेकिन फ़िरऔन, जो अपने घमंड और सरकशी में चूर था, यह देखकर भी नहीं रुका। उसने अपनी पूरी फ़ौज के साथ उनका पीछा किया। वह सोचता था कि वह मूसा और उनके साथियों को पकड़ लेगा और उन्हें सज़ा देगा। मगर अल्लाह की क़ुदरत देखिए—जब फ़िरऔन और उसकी सेना उसी रास्ते पर दाख़िल हुई जो समुद्र में बना था, तो अल्लाह ने समुद्र को उन पर हावी कर दिया। पानी की ऐसी लहरें उन पर टूट पड़ीं कि उन्होंने फ़िरऔन और उसकी पूरी सेना को अपनी लपेट में ले लिया और उन्हें डुबो दिया। यह वह पानी था जिसकी हकीकत और उसकी भयावहता को अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता—ऐसा पानी जो उनके लिए अज़ाब और तबाही बन गया।

इस तरह फ़िरऔन का घमंड मिट्टी में मिल गया, और अल्लाह की क़ुदरत के आगे उसकी सारी ताक़त बेकार साबित हुई। मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम निजात पा गए, और फ़िरऔन और उसके ज़ालिम साथी हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफ़न हो गए।

दावत और सबक:

यह वाक़िया हमें सिखाता है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे किसी की ताक़त नहीं चलती। जो लोग अल्लाह के नबियों का मुक़ाबला करते हैं और हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं, उनका अंजाम हमेशा बर्बादी होता है। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है, चाहे मुश्किलें कितनी ही बड़ी क्यों न हों। जिस तरह समुद्र में रास्ता बनाकर अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को निजात दी, उसी तरह वह आज भी अपने मोमिन बंदों की मदद करता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। यही कामयाबी की राह है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में निजात दिला सकता है।



📜 आयत 76-80 — ताहा

76جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ مَن تَزَكَّىٰ
वह सदाबहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह लोग उसमें हमेशा रहेंगे और जो गुनाह से पाक व पाकीज़ा रहे उस का यही सिला है
77وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَّا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَىٰ
और हमने मूसा के पास ''वही'' भेजी कि मेरे बन्दों (बनी इसराइल) को (मिस्र से) रातों रात निकाल ले जाओ फिर दरिया में (लाठी मारकर) उनके लिए एक सूखी राह निकालो और तुमको पीछा करने का न कोई खौफ़ रहेगा न (डूबने की) कोई दहशत
78فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِهِ فَغَشِيَهُم مِّنَ الْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْ
ग़रज़ फिरऔन ने अपने लशकर समैत उनका पीछा किया फिर दरिया (के पानी का रेला) जैसा कुछ उन पर छाया गया वह छा गया
79وَأَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُ وَمَا هَدَىٰ
और फिरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह (करके हलाक) कर डाला और उनकी हिदायत न की
80يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ قَدْ أَنجَيْنَاكُم مِّنْ عَدُوِّكُمْ وَوَاعَدْنَاكُمْ جَانِبَ الطُّورِ الْأَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰ
ऐ बनी इसराइल हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन (के पंजे) से छुड़ाया और तुम से (कोहेतूर) के दाहिने तरफ का वायदा किया और हम ही ने तुम पर मन व सलवा नाज़िल किया
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अनुवाद — ताहा 78

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Tuesday, August 18, 2026

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