अल-अंबिया · 109/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
فَإِن تَوَلَّوْا فَقُلْ آذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۖ وَإِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌ مَّا تُوعَدُونَ ۝١٠٩
Fa in tawallaw faqul aazantukum `alaa sawaaa`; wa in adreee aqareebun am ba`eedum maa too`adoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर ये लोग (उस पर भी) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मैंने तुम सबको यकसाँ ख़बर कर दी है और मैं नहीं जानता कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वायदा किया गया है क़रीब आ पहुँचा या (अभी) दूर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّوْا: मुँह मोड़ लें, इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर दें।
  • آذَنْتُكُمْ: मैंने तुम्हें सूचित कर दिया, आगाह कर दिया।
  • عَلَىٰ سَوَاءٍ: बराबरी पर, समान रूप से — यानी मैंने तुम्हें वह बात पहुँचा दी जो मुझ पर अवतरित हुई, अब मैं और तुम जानकारी में बराबर हो गए।
  • وَإِنْ أَدْرِي: मैं नहीं जानता।
  • مَا تُوعَدُونَ: जिस चीज़ का तुमसे वादा किया गया है (अर्थात अज़ाब या क़यामत)।

व्याख्या:

जब ये लोग सत्य से मुँह मोड़ लें और आपके द्वारा लाए गए मार्गदर्शन को स्वीकार न करें, तो आप उनसे कह दें: "मैंने तुम्हें वह सब कुछ स्पष्ट रूप से बता दिया है जो अल्लाह ने मुझ पर प्रकट किया है। मैंने तुम्हें चेतावनी दे दी है, और अब मेरे और तुम्हारे बीच कोई छिपी बात नहीं रही — दोनों पक्ष इस मामले में बराबर हैं। मैंने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया, तुम्हें सचेत कर दिया।"

फिर आप यह भी कहें: "मैं यह नहीं जानता कि जिस अज़ाब की तुम्हें धमकी दी गई है, वह निकट है या दूर। यह ज्ञान केवल अल्लाह के पास है। मेरा काम केवल चेतावनी देना है, और मैंने वह कर दिया।"

यह बात उनके लिए एक कठोर चेतावनी है, लेकिन साथ ही इसमें एक रहमत भी है — क्योंकि अल्लाह का अज़ाब कब आएगा, यह छिपा रखा गया ताकि लोग हमेशा सावधान रहें और अपने कर्मों को सुधारें।

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन का प्रचार करने वाले का कर्तव्य है कि वह सत्य को स्पष्ट रूप से पहुँचा दे, फिर लोगों की प्रतिक्रिया अल्लाह के हवाले कर दे। डरने की कोई बात नहीं, क्योंकि सच्चाई उजागर हो चुकी है। और जो लोग सत्य से मुँह मोड़ते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत कठोर है — वह कब आ जाए, कोई नहीं जानता। इसलिए बेहतर है कि इंसान अपने रब की ओर लौट आए, क्योंकि उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है और उसकी रहमत उसके अज़ाब से कहीं अधिक व्यापक है।



📜 आयत 107-111 — सूरा अल-अंबिया

107وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको सारे दुनिया जहाँन के लोगों के हक़ में अज़सरतापा रहमत बनाकर भेजा
108قُلْ إِنَّمَا يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
तुम कह दो कि मेरे पास तो बस यही ''वही'' आई है कि तुम लोगों का माबूद बस यकता खुदा है तो क्या तुम (उसके) फरमाबरदार बन्दे बनते हो
109فَإِن تَوَلَّوْا فَقُلْ آذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۖ وَإِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌ مَّا تُوعَدُونَ
फिर अगर ये लोग (उस पर भी) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मैंने तुम सबको यकसाँ ख़बर कर दी है और मैं नहीं जानता कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वायदा किया गया है क़रीब आ पहुँचा या (अभी) दूर है
110إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ مِنَ الْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ
इसमें शक नहीं कि वह उस बात को भी जानता है जो पुकार कर कही जाती है और जिसे तुम लोग छिपाते हो उससे भी खूब वाक़िफ है
111وَإِنْ أَدْرِي لَعَلَّهُ فِتْنَةٌ لَّكُمْ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ
और मैं ये भी नहीं जानता कि शायद ये (ताख़ीरे अज़ाब तुम्हारे) वास्ते इम्तिहान हो और एक मुअय्युन मुद्दत तक (तुम्हारे लिए) चैन हो
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
109आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 109

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Saturday, October 3, 2026

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