अल-अंबिया · 38/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٣٨
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और लुत्फ़ तो ये है कि कहते हैं कि अगर सच्चे हो तो ये क़यामत का वायदा कब (पूरा) होगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَى: कब, किस समय
  • هَذَا الْوَعْدُ: यह वादा (यानी क़ियामत और अज़ाब का वादा)
  • صَادِقِينَ: सच्चे, सत्यवादी

तफ़सीर:

काफ़िर और मुन्किरे-आख़िरत लोग मज़ाक़ और तंज़ के अंदाज़ में कहते हैं कि "यह वादा कब पूरा होगा? बताओ कि वह कौन सा समय है जब हम पर अज़ाब आएगा और क़ियामत बरपा होगी? अगर तुम (मुहम्मद और तुम्हारे साथी) अपने इस दावे में सच्चे हो तो वह वादा कब आएगा?"

यह सवाल उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वे आख़िरत और हिसाब-किताब को नहीं मानते थे। वे सोचते थे कि यह बात महज़ एक झूठ है जो मुहम्मद ﷺ और उनके साथियों ने गढ़ रखी है। इसलिए वे बार-बार तंज़ के लहजे में पूछते थे कि "यह अज़ाब कब आएगा?" — जैसे कि वे इस बात को असंभव और मज़ाक़िया समझते हों।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका आना निश्चित है। चाहे लोग मज़ाक़ उड़ाएँ या जल्दबाज़ी दिखाएँ, अल्लाह का फ़ैसला अपने वक़्त पर ज़रूर आएगा। क़ुरआन में कई जगह अल्लाह ने फ़रमाया है कि जो लोग अज़ाब की जल्दी मचाते हैं, वे उसे देखकर पछताएँगे, लेकिन तब पछतावा काम नहीं आएगा।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें आख़िरत पर पक्का यक़ीन रखना चाहिए और उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए। जो लोग आज मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, कल उन्हीं को अपनी हरकतों पर पछताना होगा। मोमिन का काम है सब्र और यक़ीन के साथ अल्लाह के वादे का इंतज़ार करना और अच्छे आमाल करते रहना। अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता — वह अपने वक़्त पर ज़रूर पूरा होगा, चाहे लोग मानें या न मानें।



📜 आयत 36-40 — सूरा अल-अंबिया

36وَإِذَا رَآكَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي يَذْكُرُ آلِهَتَكُمْ وَهُم بِذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ هُمْ كَافِرُونَ
और (ऐ रसूल) जब तुम्हें कुफ्फ़ार देखते हैं तो बस तुमसे मसखरापन करते हैं कि क्या यही हज़रत हैं जो तुम्हारे माबूदों को (बुरी तरह) याद करते हैं हालाँकि ये लोग खुद खुदा की याद से इन्कार करते हैं (तो इनकी बेवकूफ़ी पर हँसना चाहिए)
37خُلِقَ الْإِنسَانُ مِنْ عَجَلٍ ۚ سَأُرِيكُمْ آيَاتِي فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ
आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ पैदा किया गया है मैं अनक़रीब ही तुम्हें अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाऊँगा तो तुम मुझसे जल्दी की (द्दूम) न मचाओ
38وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और लुत्फ़ तो ये है कि कहते हैं कि अगर सच्चे हो तो ये क़यामत का वायदा कब (पूरा) होगा
39لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और जो लोग काफ़िर हो बैठे काश उस वक्त क़ी हालत से आगाह होते (कि जहन्नुम की आग में खडे होंगे) और न अपने चेहरों से आग को हटा सकेंगे और न अपनी पीठ से और न उनकी मदद की जाएगी
40بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةً فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
(क़यामत कुछ जता कर तो आने से रही) बल्कि वह तो अचानक उन पर आ पड़ेगी और उन्हें हक्का बक्का कर देगी फिर उस वक्त उसमें न उसके हटाने की मजाल होगी और न उन्हें ही दी जाएगी
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 38

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Saturday, October 3, 2026

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