अल-हज · 42/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُ ۝٤٢
Wa iny yukazzibooka faqad kazzabat qablahum qawmu Nooinw wa Aadunw wa Samood
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) अगर ये (कुफ्फ़ार) तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और (क़ौमे आद और समूद)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُكَذِّبُوكَ – वे तुम्हें झुठलाएँ
  • قَوْمُ نُوحٍ – नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम
  • عَادٌ – आद (हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम)
  • ثَمُودُ – समूद (सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम)

तफ़सीर:

ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! अगर आपकी क़ौम के लोग आपको झुठलाते हैं और आपके पैग़ाम को क़बूल नहीं करते, तो आप अकेले नहीं हैं जिन्हें झुठलाया गया हो। आपसे पहले भी अल्लाह के पैग़म्बरों को उनकी क़ौमों ने झुठलाया था। नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उन्हें झुठलाया, आद की क़ौम ने हूद (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया, और समूद की क़ौम ने सालिह (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया। ये सिर्फ़ कुछ मिसालें हैं, बल्कि इब्राहीम की क़ौम, लूत की क़ौम, मदयन के लोग जिन्होंने शुऐब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया, और फ़िरऔन व उसकी क़ौम ने भी मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया।

लेकिन अल्लाह ने इन सबको तुरंत सज़ा नहीं दी, बल्कि उन्हें मोहलत दी और ढील दी। फिर जब उनका वक़्त आया, तो अल्लाह ने उनमें से हर एक को उसके गुनाहों की वजह से पकड़ लिया। उनकी ताक़त, उनकी दौलत और उनकी तादाद उन्हें अल्लाह की सज़ा से नहीं बचा सकी। अल्लाह का इनकार और अज़ाब कितना सख़्त था! उनकी नेअमतें अज़ाब में बदल गईं और उनका अंजाम हलाकत के सिवा कुछ नहीं था।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली दे रहे हैं और सिखा रहे हैं कि सब्र करें, क्योंकि ये राह हमेशा से कठिन रही है। हर ज़माने में सच्चे दावत देने वालों को झुठलाया गया, लेकिन अंजाम हमेशा सच्चे लोगों के हक़ में रहा। ये हमारे लिए भी एक बड़ा सबक़ है कि जब हमें किसी अच्छे काम पर लोगों की तरफ़ से मुख़ालिफ़त या तंज़ का सामना करना पड़े, तो हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहा है और रहेगा। जो लोग सच्चाई पर क़ायम रहते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। इसलिए हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, चाहे देर से ही सही।



📜 आयत 40-44 — अल-हज

40الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّا أَن يَقُولُوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا اسْمُ اللَّهِ كَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है
41الَّذِينَ إِن مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ أَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ وَأَمَرُوا بِالْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
ये वह लोग हैं कि अगर हम इन्हें रूए ज़मीन पर क़ाबू दे दे तो भी यह लोग पाबन्दी से नमाजे अदा करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे-अच्छे काम का हुक्म करेंगे और बुरी बातों से (लोगों को) रोकेंगे और (यूँ तो) सब कामों का अन्जाम खुदा ही के एख्तेयार में है
42وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُ
और (ऐ रसूल) अगर ये (कुफ्फ़ार) तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और (क़ौमे आद और समूद)
43وَقَوْمُ إِبْرَاهِيمَ وَقَوْمُ لُوطٍ
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
44وَأَصْحَابُ مَدْيَنَ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمْلَيْتُ لِلْكَافِرِينَ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
और मदियन के रहने वाले (अपने-अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुके हैं और मूसा (भी) झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर (आख़िर) उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था
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अनुवाद — अल-हज 42

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Tuesday, August 18, 2026

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