अल-मोमिनुन · 106/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ ۝١٠٦
Qaaloo Rabbanaa ghalabat `alainaa shiqwatunaa wa kunnaa qawman daaalleen
📖 हिंदी अर्थ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شِقْوَتُنَا (शिक़्वतुऩा): हमारी बदबख़्ती, हमारा दुर्भाग्य, वह शैतानी और नफ़्सानी ख्वाहिशें जो हम पर हावी हो गईं।
  • ضَالِّينَ (ज़़ाल्लीन): गुमराह, सीधे रास्ते से भटके हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब आख़िरत के दिन ये लोग अपने रब के सामने हाज़िर होंगे और अपनी आँखों से वह कुछ देख लेंगे जो उन्होंने दुनिया में कभी सोचा भी नहीं था, तो उनकी ज़बान से ये शब्द निकलेंगे: "ऐ हमारे रब! हमारी बदबख़्ती और हमारी नफ़्सानी ख्वाहिशें हम पर ग़ालिब आ गईं।" यानी हमारी अपनी ही शहवतें, लालच, और वह अंधी दुनियापरस्ती हम पर छा गई थी, जिसने हमें सच्चाई देखने ही नहीं दी। हमारे नफ़्स ने हमें धोखे में रखा और हम उसी के पीछे चलते रहे।

फिर वे कहेंगे: "और हम गुमराह लोग थे।" यानी हम जानबूझकर सीधे रास्ते से भटके हुए थे, हमने अपने लिए गुमराही को चुना और हिदायत को ठुकरा दिया। हालाँकि हमारे पास अक़्ल और समझ थी, हमारे पास रसूलों की दावत पहुँची थी, लेकिन हमने उसे सुनने से इनकार किया और अपनी ज़िद पर अड़े रहे।

यहाँ एक बड़ी हक़ीक़त ये है कि ये लोग अपनी शिक़्वत (बदबख़्ती) को अपने रब की तरफ़ मंसूब कर रहे हैं, यानी कह रहे हैं कि हम पर शिक़्वत लिख दी गई थी। लेकिन ये उनका बहाना है, क्योंकि अल्लाह ने किसी को ज़बरदस्ती गुमराह नहीं किया। अल्लाह ने हर इंसान को अक़्ल दी, रसूल भेजे, और सही रास्ता दिखाया। जिसने सच्चाई को क़बूल किया वह कामयाब हुआ, और जिसने अपनी ख्वाहिशों की पैरवी की वह गुमराह हुआ।

प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें बड़ी सीख देती है कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी अपने नफ़्स की ख्वाहिशों को अपने ऊपर हावी न होने दें। शैतान और नफ़्स की पैरवी इंसान को धीरे-धीरे ऐसी जगह पहुँचा देती है जहाँ से वापसी मुश्किल हो जाती है। आज हमारे पास मौक़ा है, आज हम ज़िंदा हैं, आज हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत है। आओ हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें, ताकि क़यामत के दिन हमें ये कहने की नौबत न आए कि "हम पर हमारी बदबख़्ती हावी हो गई।"

अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 104-108 — अल-मोमिनुन

104تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
105أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
106قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
107رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْهَا فَإِنْ عُدْنَا فَإِنَّا ظَالِمُونَ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं
108قَالَ اخْسَئُوا فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
106आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 106

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Tuesday, August 18, 2026

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