अल-मोमिनुन · 36/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
۞ هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ ۝٣٦
Haihaata haihaata limaa too`adoon
📖 हिंदी अर्थ
बिल्कुल (अक्ल से) दूर और क़यास से बईद है (दो बार ज़िन्दा होना कैसा) बस यही तुम्हारी दुनिया की ज़िन्दगी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ – यह शब्द दूरी और असम्भवता को व्यक्त करने के लिए आता है, अर्थात "बहुत दूर है, बहुत दूर है" यानी यह बात अत्यंत असम्भव और दूर की कौड़ी है।
  • لِمَا تُوعَدُونَ – उस चीज़ के लिए जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है, अर्थात पुनर्जीवित होकर क़ब्रों से निकलने का वादा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों के कथन को उद्धृत कर रही है जो पुनरुत्थान (आख़िरत में दोबारा जीवित होने) का मज़ाक उड़ाते थे। वे कहते थे: "बहुत दूर है, बहुत दूर है वह चीज़ जिसका तुम हमसे वादा करते हो!" उनका इशारा उस बात की ओर था कि जब हम मरकर मिट्टी और सड़ी हड्डियाँ बन जाएँगे, तो हम कैसे दोबारा ज़िंदा होकर क़ब्रों से निकलेंगे? उन्हें यह बात अत्यंत असम्भव और दूर की कल्पना लगती थी, इसलिए वे इसे हँसी-मज़ाक में उड़ाते थे।

यहाँ अल्लाह तआला उनके इसी कथन को उद्धृत कर रहा है ताकि उनकी नादानी और अक़्ल की कमी सामने आए। वे उस शक्ति को भूल गए जिसने उन्हें पहली बार पैदा किया। जो अल्लाह पहली बार पैदा कर सकता है, वह दोबारा क्यों नहीं पैदा कर सकता? क़ुरआन में कहीं और अल्लाह फ़रमाता है: "जैसे हमने पहली बार पैदा किया, हम उसे दोबारा लौटाएँगे।" (सूरतुल-अम्बिया: 104)

दावती पहलू (इस्लाम की ओर बुलाने का पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत पर ईमान हर मुसलमान के ईमान का अहम हिस्सा है। जो लोग पुनरुत्थान को दूर की बात समझते हैं, वही लोग अपनी ज़िंदगी में आज़ाद होकर गुनाह करते हैं, क्योंकि उन्हें किसी हिसाब का डर नहीं होता। लेकिन जो शख्स यक़ीन रखता है कि एक दिन उसे अल्लाह के सामने खड़ा होना है और उसके हर अमल का हिसाब होगा, वह अपनी ज़िंदगी को संवारता है, नेकियाँ कमाता है और बुराइयों से बचता है।

अल्लाह तआला की क़ुदरत पर ग़ौर करो — वही अल्लाह जिसने आकाश और धरती को पैदा किया, जिसने हर ज़िंदा चीज़ को ज़िंदगी दी, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है। यही ईमान हमें मज़बूती देता है और हमें अच्छे अमल की तरफ़ राहनुमाई करता है। आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हर इंसान अपने किए का फल पाएगा।



📜 आयत 34-38 — अल-मोमिनुन

34وَلَئِنْ أَطَعْتُم بَشَرًا مِّثْلَكُمْ إِنَّكُمْ إِذًا لَّخَاسِرُونَ
और अगर कहीं तुम लोगों ने अपने ही से आदमी की इताअत कर ली तो तुम ज़रुर घाटे में रहोगे
35أَيَعِدُكُمْ أَنَّكُمْ إِذَا مِتُّمْ وَكُنتُمْ تُرَابًا وَعِظَامًا أَنَّكُم مُّخْرَجُونَ
क्या ये शख्स तुमसे वायदा करता है कि जब तुम मर जाओगे और (मर कर) सिर्फ मिट्टी और हड्डियाँ (बनकर) रह जाओगे तो तुम दुबारा ज़िन्दा करके कब्रों से निकाले जाओगे (है है अरे) जिसका तुमसे वायदा किया जाता है
36۞ هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ
बिल्कुल (अक्ल से) दूर और क़यास से बईद है (दो बार ज़िन्दा होना कैसा) बस यही तुम्हारी दुनिया की ज़िन्दगी है
37إِنْ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ
कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और हम तो फिर (दुबारा) उठाए नहीं जाएँगे हो न हो ये (सालेह) वह शख्स है जिसने खुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाँधा है
38إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِنِينَ
और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं (ये हालत देखकर) सालेह ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले चूँकि इन लोगों ने मुझे झुठला दिया
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 36

सूरा अल-मोमिनुन आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बिल्कुल (अक्ल से) दूर और क़यास से बईद है (दो…

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Tuesday, August 18, 2026

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