अल-मोमिनुन · 6/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ ۝٦
Illaa `alaaa azwaajihim aw maa malakat aimaanuhum fa innahum ghairu maloomeen
📖 हिंदी अर्थ
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَزْوَاجِهِمْ: उनकी पत्नियाँ।
  • مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ: वे दासियाँ (लौंडियाँ) जो उनके स्वामित्व में हों।
  • غَيْرُ مَلُومِينَ: निन्दित नहीं, कोई दोष या पाप उन पर नहीं।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों की विशेषताओं का वर्णन कर रही है जो अपनी शर्मगाहों की रक्षा करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये पवित्र लोग अपनी यौन इच्छाओं को केवल दो वैध स्रोतों तक सीमित रखते हैं: अपनी पत्नियाँ और वे दासियाँ जो उनके स्वामित्व में हों (जैसे युद्धबंदी या वैध तरीके से प्राप्त दासियाँ)। इन दोनों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करना, उनसे आनंद लेना, और उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना पूर्णतः हलाल (वैध) है। इस पर उन्हें कोई मलामत (निन्दा), गुनाह या मोमिनीन की नज़र में कोई दोष नहीं है, क्योंकि अल्लाह ने स्वयं इसे हलाल किया है।

यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह आयत विशेष रूप से पुरुषों के बारे में है, क्योंकि स्त्री के लिए अपने मालिक (गुलाम) के साथ ऐसा सम्बन्ध जायज़ नहीं है। स्त्री की पवित्रता की रक्षा अन्य आयतों (जैसे "अल-मोमिनून" की आगे की आयतों और "अन-नूर" की आयत) से सिद्ध है, जहाँ अल्लाह ने स्त्रियों को भी अपनी शर्मगाहों की रक्षा करने का आदेश दिया है।

दावती पहलू:

यह आयत इस्लाम की पवित्रता और व्यावहारिकता का सुंदर उदाहरण है। इस्लाम ने मनुष्य की स्वाभाविक इच्छाओं को नकारा नहीं, बल्कि उन्हें पाक और वैध रास्ता दिया। अल्लाह ने शादी को बरकत वाला बंधन बनाया और उसे ही इच्छा पूर्ति का माध्यम ठहराया। यही कारण है कि मोमिन का दिल इस्लामी क़ानून की हर बात पर संतुष्ट रहता है, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह का हर हुक्म इंसान की भलाई के लिए है। जो व्यक्ति इन वैध सीमाओं में रहता है, वह दुनिया में भी चैन पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है। यही वह पाक राह है जो इंसान को गुनाहों की गंदगी से बचाकर अल्लाह की रहमत तक पहुँचाती है।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-मोमिनुन

4وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
5وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
6إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता
7فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
पस जो शख्स उसके सिवा किसी और तरीके से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
8وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 6

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Friday, October 2, 2026

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