अल-मोमिनुन · 65/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
لَا تَجْأَرُوا الْيَوْمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ ۝٦٥
Laa taj`arul yawma innakum minnaa laa tunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لا تَجْأَرُوا – चीख़ो-चिल्लाओ मत, फ़रियाद मत करो।
  • مِنَّا – हमारी ओर से।
  • لا تُنْصَرُونَ – तुम्हें कोई सहायता नहीं दी जाएगी, न तुम बचाए जाओगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़यामत के दिन ये काफ़िर और मुनाफ़िक़ लोग अपनी आँखों से वो अज़ाब देखेंगे जो उनके लिए तैयार किया गया है, तो वे डर और घबराहट से चीख़ने-चिल्लाने लगेंगे, और मदद की गुहार लगाएँगे। उस वक़्त अल्लाह तआला की ओर से उन्हें डाँटा जाएगा और कहा जाएगा: "आज चीख़ो-चिल्लाओ मत, और न ही मदद की फ़रियाद करो! क्योंकि आज तुम्हें हमारी ओर से कोई मदद नहीं मिलेगी। न तो तुम ख़ुद अपनी जान बचा सकते हो, और न ही कोई और तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला है।"

यह वो लम्हा है जब सारे बहाने ख़त्म हो जाते हैं, सारे झूठे सहारे टूट जाते हैं, और इंसान को सिर्फ़ अपने किए की सज़ा का सामना करना पड़ता है। दुनिया में जिन्होंने अल्लाह के आगे सर नहीं झुकाया, उन्हें उस दिन मजबूरी में झुकना पड़ेगा, लेकिन वहाँ की पेशानी और दुआएँ किसी काम की नहीं होंगी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बड़ी सीख देती है कि मदद और नुसरत का दरवाज़ा आज खुला है, जब तक हम दुनिया में हैं। आज अगर हम अल्लाह से दुआ करें, तौबा करें, और उसकी राह पर चलें, तो वह हमें बचा लेगा। लेकिन जो लोग आज अल्लाह की याद से मुँह मोड़ते हैं, और उसके हुक्म को नहीं मानते, उनके लिए क़यामत का दिन बड़ा भयानक होगा, जब कोई मददगार न होगा। प्यारे भाइयों और बहनों! आज ही का दिन है अल्लाह की रहमत और माफ़ी हासिल करने का। आज ही तौबा कर लो, नमाज़ क़ायम करो, और अल्लाह के बताए रास्ते पर चलो, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिन्हें चीख़ने-चिल्लाने के सिवा कुछ न मिले। अल्लाह हम सबको समझ दे और सीधी राह पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 63-67 — सूरा अल-मोमिनुन

63بَلْ قُلُوبُهُمْ فِي غَمْرَةٍ مِّنْ هَٰذَا وَلَهُمْ أَعْمَالٌ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمْ لَهَا عَامِلُونَ
उनके दिल उसकी तरफ से ग़फलत में पडे हैं इसके अलावा उन के बहुत से आमाल हैं जिन्हें ये (बराबर किया करते है) और बाज़ नहीं आते
64حَتَّىٰ إِذَا أَخَذْنَا مُتْرَفِيهِم بِالْعَذَابِ إِذَا هُمْ يَجْأَرُونَ
यहाँ तक कि जब हम उनके मालदारों को अज़ाब में गिरफ््तार करेंगे तो ये लोग वावैला करने लगेंगें
65لَا تَجْأَرُوا الْيَوْمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती
66قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنكِصُونَ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते
67مُسْتَكْبِرِينَ بِهِ سَامِرًا تَهْجُرُونَ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
65आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 65

सूरा अल-मोमिनुन आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब…

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Monday, September 28, 2026

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