अल-मोमिनुन · 87/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ ۝٨٧
Sa yaqooloona lillaah; qul afalaa tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِلَّهِ – अल्लाह ही के लिए है (यानी ये सब चीज़ें अल्लाह ही की मिल्कियत हैं)
  • أَفَلَا تَتَّقُونَ – तो क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो? (यानी उसके अज़ाब से बचने के लिए तक़वा क्यों नहीं अपनाते?)

तफ़सीर:

जब इन मुशरिकीन से पूछा जाता है कि ये सातों आसमान, ये विशाल अर्श और ये सारी कायनात किसकी है? तो वे अपनी फ़ितरत के बावजूद इसका जवाब देने पर मजबूर हो जाते हैं और कहते हैं: "ये सब अल्लाह ही की हैं।" वे इस सच्चाई को जानते हुए भी उसे मानने से इनकार करते हैं।

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि उनसे कहो: "जब तुम ख़ुद मानते हो कि ये सब कुछ अल्लाह का है, तो क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते? क्या तुम्हें उसके अज़ाब का ख़ौफ़ नहीं? जब तुम जानते हो कि सृष्टि का मालिक, पालनहार और शासक अकेला अल्लाह है, तो फिर उसके सिवा दूसरों की इबादत क्यों करते हो? क्या तुम्हें उसके सामने अपने किए का डर नहीं? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बाज़ नहीं आते?"

ये एक बहुत ही स्पष्ट और दिल को छू लेने वाली दलील है। जब इंसान ख़ुद अपनी ज़बान से ये गवाही देता है कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर उसे चाहिए कि वह अपने अक़ीदे और अमल को इसी गवाही के मुताबिक़ बनाए। अल्लाह से डरना, उसके हुक्मों का पालन करना और उसकी नाराज़गी से बचना ही असली तक़वा है।

प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें सिखाती है कि हमारा दिल, हमारी ज़बान और हमारा अमल — तीनों एक जैसे होने चाहिए। जब हम मानते हैं कि अल्लाह ही हमारा रब है, तो हमें उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करना चाहिए। अल्लाह से डरना और उसके दीन पर चलना ही हमारी कामयाबी की कुंजी है। यही वो रास्ता है जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें और उसके हुक्मों पर अमल करके उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 85-89 — सूरा अल-मोमिनुन

85سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे
86قُلْ مَن رَّبُّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि सातों आसमानों का मालिक और (इतने) बड़े अर्श का मालिक कौन है तो फौरन जवाब देगें कि (सब कुछ) खुदा ही का है
87سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे
88قُلْ مَن بِيَدِهِ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيْءٍ وَهُوَ يُجِيرُ وَلَا يُجَارُ عَلَيْهِ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि भला अगर तुम कुछ जानते हो (तो बताओ) कि वह कौन शख्स है- जिसके एख्तेयार में हर चीज़ की बादशाहत है वह (जिसे चाहता है) पनाह देता है और उस (के अज़ाब) से पनाह नहीं दी जा सकती
89سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ فَأَنَّىٰ تُسْحَرُونَ
तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
87आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 87

सूरा अल-मोमिनुन आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं…

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Thursday, October 1, 2026

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