अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِلَّهِ – अल्लाह ही के लिए है (यानी ये सब चीज़ें अल्लाह ही की मिल्कियत हैं)
- أَفَلَا تَتَّقُونَ – तो क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो? (यानी उसके अज़ाब से बचने के लिए तक़वा क्यों नहीं अपनाते?)
तफ़सीर:
जब इन मुशरिकीन से पूछा जाता है कि ये सातों आसमान, ये विशाल अर्श और ये सारी कायनात किसकी है? तो वे अपनी फ़ितरत के बावजूद इसका जवाब देने पर मजबूर हो जाते हैं और कहते हैं: "ये सब अल्लाह ही की हैं।" वे इस सच्चाई को जानते हुए भी उसे मानने से इनकार करते हैं।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि उनसे कहो: "जब तुम ख़ुद मानते हो कि ये सब कुछ अल्लाह का है, तो क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते? क्या तुम्हें उसके अज़ाब का ख़ौफ़ नहीं? जब तुम जानते हो कि सृष्टि का मालिक, पालनहार और शासक अकेला अल्लाह है, तो फिर उसके सिवा दूसरों की इबादत क्यों करते हो? क्या तुम्हें उसके सामने अपने किए का डर नहीं? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बाज़ नहीं आते?"
ये एक बहुत ही स्पष्ट और दिल को छू लेने वाली दलील है। जब इंसान ख़ुद अपनी ज़बान से ये गवाही देता है कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर उसे चाहिए कि वह अपने अक़ीदे और अमल को इसी गवाही के मुताबिक़ बनाए। अल्लाह से डरना, उसके हुक्मों का पालन करना और उसकी नाराज़गी से बचना ही असली तक़वा है।
प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें सिखाती है कि हमारा दिल, हमारी ज़बान और हमारा अमल — तीनों एक जैसे होने चाहिए। जब हम मानते हैं कि अल्लाह ही हमारा रब है, तो हमें उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करना चाहिए। अल्लाह से डरना और उसके दीन पर चलना ही हमारी कामयाबी की कुंजी है। यही वो रास्ता है जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें और उसके हुक्मों पर अमल करके उसकी रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 85-89 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 87
सूरा अल-मोमिनुन आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं…सूरा आयत 87/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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