अल-मोमिनुन · 95/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَإِنَّا عَلَىٰ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمْ لَقَادِرُونَ ۝٩٥
Wa innaa `alaaa an nuriyaka maa na`iduhum laqaadiroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हम यक़ीनन इस पर क़ादिर हैं कि जिस (अज़ाब) का हम उनसे वायदा करते हैं तुम्हें दिखा दें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُرِيَكَ – हम तुम्हें दिखा दें
  • مَا نَعِدُهُمْ – जिस (अज़ाब) का हम उनसे वादा करते हैं
  • لَقَادِرُونَ – निश्चित रूप से सामर्थ्य रखने वाले हैं

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमा रहे हैं कि ऐ मेरे रसूल! जिस अज़ाब (यातना) की धमकी हम इन काफ़िरों को दे रहे हैं, उसे तुम्हें दिखा देना हमारे लिए बिल्कुल आसान है। हम उस पर पूर्ण सामर्थ्य रखते हैं, और हमारी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं है। यह कोई मुश्किल काम नहीं कि हम उन्हें सज़ा दें और तुम उसे अपनी आँखों से देख लो।

यह वादा अल्लाह ने पूरा भी किया। चुनांचे बद्र के मैदान में अल्लाह ने काफ़िरों को ऐसी सज़ा दी कि उनके सरदार मारे गए और वे अपमानित होकर लौटे। यह उस अज़ाब का एक नमूना था, जबकि आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं बड़ा और स्थायी है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की क़ुदरत असीम है। वह जब चाहता है, अपने वादे को पूरा करके दिखा देता है। नबी ﷺ और मोमिनीन के लिए इसमें बड़ी तसल्ली है कि अल्लाह अपने दुश्मनों को कभी नहीं छोड़ता। चाहे सज़ा में देर हो, लेकिन अल्लाह का फैसला ज़रूर आता है। यह हमारे ईमान की मज़बूती का ज़रिया है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसका वादा सच्चा है। जो लोग अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और उनका मज़ाक उड़ाते हैं, उनके लिए अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। मोमिन के लिए यह आयत सब्र और भरोसे की तालीम है — अल्लाह पर भरोसा रखो, वह देर ज़रूर करता है, लेकिन भूलता नहीं।



📜 आयत 93-97 — सूरा अल-मोमिनुन

93قُل رَّبِّ إِمَّا تُرِيَنِّي مَا يُوعَدُونَ
(ऐ रसूल) तुम दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले जिस (अज़ाब) का तूने उनसे वायदा किया है अगर शायद तू मुझे दिखाए
94رَبِّ فَلَا تَجْعَلْنِي فِي الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
तो परवरदिगार मुझे उन ज़ालिम लोगों के हमराह न करना
95وَإِنَّا عَلَىٰ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمْ لَقَادِرُونَ
और (ऐ रसूल) हम यक़ीनन इस पर क़ादिर हैं कि जिस (अज़ाब) का हम उनसे वायदा करते हैं तुम्हें दिखा दें
96ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ السَّيِّئَةَ ۚ نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَصِفُونَ
और बुरी बात के जवाब में ऐसी बात कहो जो निहायत अच्छी हो जो कुछ ये लोग (तुम्हारी निस्बत) बयान करते हैं उससे हम ख़ूब वाक़िफ हैं
97وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ
और (ये भी) दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मै शैतान के वसवसों से तेरी पनाह माँगता हूँ
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
95आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 95

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Thursday, October 1, 2026

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