अल-मोमिनुन · 96/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ السَّيِّئَةَ ۚ نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَصِفُونَ ۝٩٦
Idfa` billate hiya ahsanus saiyi`ah; nahnu a`lamu bimaa yasifoon
📖 हिंदी अर्थ
और बुरी बात के जवाब में ऐसी बात कहो जो निहायत अच्छी हो जो कुछ ये लोग (तुम्हारी निस्बत) बयान करते हैं उससे हम ख़ूब वाक़िफ हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ادْفَعْ: टालो, दूर करो।
  • بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ: उस तरीके से जो सबसे अच्छा हो।
  • السَّيِّئَةَ: बुराई, कष्ट, तकलीफ।
  • نَحْنُ أَعْلَمُ: हम सबसे अधिक जानने वाले हैं।
  • بِمَا يَصِفُونَ: उन बातों से जो वे (मुशरिकीन) कहते/बयान करते हैं।

तफसीर:

ऐ नबी! जब आपके दुश्मन आपको बुराई पहुँचाएँ — चाहे वह बोलकर हो या किसी काम से — तो आप उनका जवाब बुराई से न दें। बल्कि उस बुराई को उस सबसे अच्छे तरीके से दूर करें जो आपके पास है, यानी क्षमा, सहनशीलता, नेक अख़लाक़ और भलाई से पलटवार करें। अगर वे आपको तकलीफ़ दें, तो आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें; अगर वे आपके बारे में झूठ बोलें, तो आप उनके बारे में सच बोलें; अगर वे आपसे दुश्मनी करें, तो आप उनसे नर्मी और मोहब्बत का रास्ता अपनाएँ। यही वह तरीका है जो दिलों को नरम करता है, दुश्मनी को मोहब्बत में बदल सकता है, और यही अल्लाह को सबसे अधिक पसंद है।

और ऐ रसूल! आप इस बात की परवाह न करें कि ये मुशरिकीन आपके बारे में क्या कहते हैं — कि आप जादूगर हैं, पागल हैं, या झूठे हैं। हम (अल्लाह) उनकी हर बात को खूब जानते हैं, चाहे वे आपको बदनाम करने के लिए कुछ भी कहें या अल्लाह के बारे में झूठे विश्वास (शिर्क) पालें। हमारे पास उनका पूरा हिसाब है, और हम उन्हें उनके किए की सज़ा ज़रूर देंगे — और वह सज़ा बहुत सख्त होगी।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि अख़लाक़ और रहन-सहन का पूरा निज़ाम है। जब हम बुराई का जवाब भलाई से देते हैं, तो हम अपने दिल को पाक रखते हैं, अपने रब की मुहब्बत कमाते हैं, और दूसरों के दिलों में इस्लाम की मीठी तस्वीर बनाते हैं। याद रखिए, बुराई का जवाब बुराई से देना आसान है, लेकिन भलाई से देना उन्हीं का काम है जिनके दिलों में अल्लाह का डर और उसकी मुहब्बत हो। अल्लाह हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम अपने गुस्से पर क़ाबू रखें, माफ़ करना सीखें, और हर हाल में नेकी और सब्र का रास्ता अपनाएँ। यही रास्ता दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी का ज़रिया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 94-98 — अल-मोमिनुन

94رَبِّ فَلَا تَجْعَلْنِي فِي الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
तो परवरदिगार मुझे उन ज़ालिम लोगों के हमराह न करना
95وَإِنَّا عَلَىٰ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمْ لَقَادِرُونَ
और (ऐ रसूल) हम यक़ीनन इस पर क़ादिर हैं कि जिस (अज़ाब) का हम उनसे वायदा करते हैं तुम्हें दिखा दें
96ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ السَّيِّئَةَ ۚ نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَصِفُونَ
और बुरी बात के जवाब में ऐसी बात कहो जो निहायत अच्छी हो जो कुछ ये लोग (तुम्हारी निस्बत) बयान करते हैं उससे हम ख़ूब वाक़िफ हैं
97وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ
और (ये भी) दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मै शैतान के वसवसों से तेरी पनाह माँगता हूँ
98وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِ
और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि शयातीन मेरे पास आएँ
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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मक्कीRevelation
96आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 96

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Tuesday, August 18, 2026

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