अश-शुआरा · 110/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝١١٠
Fattaqul laaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग बोले जब कमीनो मज़दूरों वग़ैरह ने (लालच से) तुम्हारी पैरवी कर ली है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاتَّقُوا اللَّهَ – अल्लाह से डरो, उसकी नाराज़गी से बचो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से रुको।
  • وَأَطِيعُونِ – और मेरी आज्ञा मानो, मेरे बताए रास्ते पर चलो।

तफ़सीर:

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को कई बार नसीहत की और उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाया। उन्होंने अपनी क़ौम को साफ़-साफ़ बता दिया कि मैं तुम्हारे लिए अल्लाह का भेजा हुआ अमानतदार रसूल हूँ। मैं तुमसे कोई बदला या मेहनताना नहीं माँगता, मेरा इनाम तो बस अल्लाह के पास है। इसलिए मेरी एक ही माँग है—कि तुम अल्लाह से डरो और उसकी नाराज़गी से बचो, और मेरी बात मानो।

इस आयत में नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "तो तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।" यानी अल्लाह के अज़ाब से बचने का एक ही रास्ता है—तक़वा (अल्लाह का डर) और रसूल की इताअत (आज्ञापालन)। जो शख्स अल्लाह से डरता है और रसूल की बताई हुई राह पर चलता है, वही दुनिया और आख़िरत में कामयाब है।

यहाँ "अल्लाह से डरो" का मतलब है कि उसकी इबादत करो, उसके साथ किसी को शरीक न करो, और उसके हुक्मों को मानो। और "मेरी आज्ञा मानो" का मतलब है कि जो कुछ मैं अल्लाह की तरफ़ से लेकर आया हूँ, उसे क़बूल करो और उस पर अमल करो। यही नजात (मुक्ति) का रास्ता है।

यह आयत हम सबके लिए भी एक प्यारा पैग़ाम है। अल्लाह तआला हमसे यही चाहता है—कि हम उससे डरें, उसकी रहमत की उम्मीद रखें, और उसके नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलें। जब हम अल्लाह के डर और रसूल की इताअत को अपनी ज़िंदगी का उसूल बना लेंगे, तो हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी, हमारे दिलों को सुकून मिलेगा और आख़िरत में हमें जन्नत की नेअमतें हासिल होंगी।

याद रखिए, नूह (अलैहिस्सलाम) ने 950 साल तक अपनी क़ौम को इसी बात की दावत दी—अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो। यही दीन की असल बुनियाद है। आज हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह से डरें और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 108-112 — अश-शुआरा

108فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और मैं इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ उजरत तो माँगता नहीं
109وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मेरी उजरत तो बस सारे जहाँ के पालने वाले ख़ुदा पर है
110فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग बोले जब कमीनो मज़दूरों वग़ैरह ने (लालच से) तुम्हारी पैरवी कर ली है
111۞ قَالُوا أَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْأَرْذَلُونَ
तो हम तुम पर क्या ईमान लाएं
112قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
नूह ने कहा ये लोग जो कुछ करते थे मुझे क्या ख़बर (और क्या ग़रज़)
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अनुवाद — अश-शुआरा 110

सूरा अश-शुआरा आयत 110 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो वह लोग…

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Tuesday, August 18, 2026

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