अश-शुआरा · 118/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ۝١١٨
Faftab bainee wa bai nahum fat hanw wa najjinee wa mam ma`iya minal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
तो अब तू मेरे और इन लोगों के दरमियान एक क़तई फैसला कर दे और मुझे और जो मोमिनीन मेरे साथ हें उनको नजात दे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَافْتَحْ – निर्णय कर दीजिए, फ़ैसला कर दीजिए
  • فَتْحًا – निर्णायक फ़ैसला, स्पष्ट न्याय
  • وَنَجِّنِي – और मुझे बचा लीजिए
  • مَن مَّعِيَ – जो मेरे साथ हैं

तफ़सीर:

जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि उनकी क़ौम सच्चाई को ठुकरा रही है, हठ और ज़िद पर अड़ी हुई है, और उनकी दावत का कोई असर नहीं पड़ रहा, तो उन्होंने अपने रब की दरगाह में दुआ की। यह दुआ किसी बदले की भावना से नहीं थी, बल्कि यह एक नबी की मजबूरी थी जो देख चुके थे कि उनकी क़ौम पर अल्लाह की यात्रा का फ़ैसला सुन चुका है।

उन्होंने कहा: "मेरे रब! मेरे और मेरी क़ौम के बीच एक निर्णायक फ़ैसला कर दे।" यानी ऐ अल्लाह! तू ही सच्चा न्यायाधीश है। तू मेरे और उनके बीच ऐसा फ़ैसला कर जो सत्य को स्पष्ट कर दे, जो हक़ को बातिल से अलग कर दे, और जो उन लोगों को उनके कुकर्मों का बदला दे जिन्होंने तेरी आयतों को झुठलाया और तेरे नबी का मज़ाक उड़ाया।

फिर उन्होंने कहा: "और मुझे और मेरे साथ के मोमिनों को बचा ले।" यह दुआ सिखाती है कि नबी सिर्फ़ अपनी नहीं सोचते, बल्कि अपने साथ के हर ईमानवाले की फ़िक्र करते हैं। वे चाहते थे कि जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए हैं, जिन्होंने सच्चाई को क़बूल किया है, वे उस अज़ाब से महफूज़ रहें जो काफ़िरों पर आने वाला है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ा सबक़ है। जब इंसान अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर ले, हक़ की दावत दे दे, और फिर भी लोग न मानें, तो उसे अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए और उसी से न्याय की फ़रियाद करनी चाहिए। अल्लाह का फ़ैसला हमेशा अदल पर होता है। वह कभी ज़ालिमों को बेसज़ा नहीं छोड़ता, और कभी अपने नेक बंदों को उनके ईमान की बदौलत अज़ाब में नहीं डालता।

यह दुआ हमें सिखाती है कि मुसीबत के वक़्त में अल्लाह की तरफ़ रुजू करना, उसी से मदद माँगना, और अपने साथ के मोमिनों के लिए भी दुआ करना — यही सच्चे ईमान की निशानी है। अल्लाह अपने नबी की यह दुआ क़बूल करता है और हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ के मोमिनों को उस तूफ़ान से बचा लेता है जो काफ़िरों के लिए हलाकत का सबब बना। यह अल्लाह की सुन्नत है — वह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और अपने दुश्मनों को उनके किए का बदला देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 116-120 — अश-शुआरा

116قَالُوا لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ नूह अगर तुम अपनी हरकत से बाज़ न आओगे तो ज़रुर संगसार कर दिए जाओगे
117قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِي كَذَّبُونِ
नूह ने अर्ज की परवरदिगार मेरी क़ौम ने यक़ीनन मुझे झुठलाया
118فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो अब तू मेरे और इन लोगों के दरमियान एक क़तई फैसला कर दे और मुझे और जो मोमिनीन मेरे साथ हें उनको नजात दे
119فَأَنجَيْنَاهُ وَمَن مَّعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
ग़रज़ हमने नूह और उनके साथियों को जो भरी हुई कश्ती में थे नजात दी
120ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ
फिर उसके बाद हमने बाक़ी लोगों को ग़रक कर दिया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
118आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 118

सूरा अश-शुआरा आयत 118 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो अब तू मेरे और इन लोगों के दरमियान एक…

सूरा आयत 118/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 116–120. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए