अश-शुआरा · 146/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ ۝١٤٦
Atutrakoona fee maa haahunnaaa aamineen
📖 हिंदी अर्थ
क्या जो चीजें यहाँ (दुनिया में) मौजूद है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अतुतरकून: क्या तुम छोड़ दिए जाओगे?
  • फ़ी मा हाहुन्ना: उस (सुख-साधन) में जो यहाँ (दुनिया) में है
  • आमिनीन: निडर, भयरहित, सुरक्षित

व्याख्या:

अल्लाह तआला हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम (समूद) को सम्बोधित करते हुए फ़रमा रहे हैं—क्या तुम लोग यह समझ बैठे हो कि जो कुछ यहाँ इस दुनिया में तुम्हें दिया गया है, वह हमेशा रहेगा? क्या तुम्हें इस बात का कोई भय नहीं कि यह सब कुछ एक दिन समाप्त हो जाएगा? क्या तुम मौत और अज़ाब से बिल्कुल सुरक्षित हो गए हो?

तुम बाग़ों में, सोतों के पास, खेती और अच्छी फ़सलों के बीच, और खजूर के उन पेड़ों के नीचे जिनके फल पके और नरम हैं, अपने को हमेशा रहने वाला समझते हो? तुमने पहाड़ों को काटकर अपने लिए शानदार घर बनाए हैं और अपनी कारीगरी पर घमंड करते हो। क्या तुम सोचते हो कि यह सब तुम्हें बिना किसी जवाबदेही के मिला है? क्या तुम पर कोई हिसाब नहीं होगा?

यह प्रश्न वास्तव में एक चेतावनी है—कि यह दुनिया का सुख-साधन कभी स्थायी नहीं है। जो लोग अपनी ताकत और साधनों पर इतराते हैं, वही अक्सर अल्लाह की पकड़ से बच नहीं पाते। अल्लाह तआला ने यह नेमतें तुम्हें इसलिए नहीं दीं कि तुम उनमें मग्न होकर अपने रब को भूल जाओ, बल्कि इसलिए दीं कि तुम उसका शुक्र अदा करो और उसकी इबादत करो।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की चमक-दमक और सुख-सुविधाएँ किसी को धोखे में न डालें। जिसने भी इन नेमतों को पाकर अल्लाह की नाफ़रमानी की, उसका अंजाम बुरा हुआ। समूद की क़ौम ने भी यही किया—उन्होंने अपनी ताकत और साधनों पर घमंड किया और नबी की बात न मानी, तो अल्लाह की पकड़ ने उन्हें इस तरह मिटा दिया कि कोई निशान न बचा।

आज भी यही पैग़ाम है—जो लोग अपने धन-दौलत, मकानात और तरक्की पर इतराते हैं और अल्लाह को भूल जाते हैं, उन्हें याद दिलाना चाहिए कि यह सब कुछ अस्थायी है। अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों बड़ी हैं। बेहतर है कि हम इन नेमतों का सही उपयोग करें, अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, और उसकी इबादत में अपना जीवन बिताएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की सलामती और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 144-148 — सूरा अश-शुआरा

144فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो खुदा से डरो और मेरी इताअत करो
145وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता- मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा पर है)
146أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ
क्या जो चीजें यहाँ (दुनिया में) मौजूद है
147فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
बाग़ और चश्में और खेतिया और छुहारे जिनकी कलियाँ लतीफ़ व नाज़ुक होती है
148وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ
उन्हीं मे तुम लोग इतमिनान से (हमेशा के लिए) छोड़ दिए जाओगे
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
146आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 146

सूरा अश-शुआरा आयत 146 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या जो चीजें यहाँ (दुनिया में) मौजूद है

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Sunday, October 4, 2026

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