अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नात (جَنَّاتٍ): बाग़, बग़ीचे, हरे-भरे बाग़ात।
- उयून (عُيُونٍ): बहते हुए चश्मे, पानी के सोते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम 'समूद' के उन लोगों के क़ौल को बयान कर रही है, जिन्होंने अपने नबी से कहा था कि क्या हमें उन चीज़ों से दूर किया जाएगा जिनमें हम आराम और सुख-चैन से जी रहे हैं? वे लोग अपनी दुनियावी ख़ुशहाली पर इतने मग़रूर थे कि उन्होंने आख़िरत और अज़ाब की परवाह ही नहीं की। वे कहते थे: "क्या हमें उन बाग़ों और बहते चश्मों में छोड़ दिया जाएगा?" यानी वे अपनी ज़िंदगी को ही सब कुछ समझते थे और उन्हें यक़ीन था कि उनकी यह नेमतें कभी ख़त्म नहीं होंगी।
यहाँ अल्लाह तआला उनकी इसी ग़फ़लत और लापरवाही का ज़िक्र कर रहे हैं। वे लोग हरे-भरे बाग़ात, बहते पानी के सोतों, खेती और लज़ीज़ फलों में मस्त थे, और पहाड़ों को काटकर शानदार घर बनाते थे। उन्हें अपनी ताक़त और दौलत पर नाज़ था, लेकिन वे भूल गए कि यह सब कुछ अल्लाह की देन है और एक दिन यह सब ख़त्म होने वाला है। उन्होंने अपने नबी की नसीहत को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब को अपने ऊपर हक़ीक़त नहीं समझा।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि दुनिया की नेमतें और सुख-सुविधाएँ किसी को भी अल्लाह की इताअत से ग़ाफ़िल नहीं करनी चाहिए। जिसे अल्लाह ने बाग़ और चश्मे दिए हैं, उसे चाहिए कि वह शुक्र अदा करे और याद रखे कि यह सब आज़माइश है, हमेशा के लिए नहीं। अल्लाह तआला की रहमत और जन्नत की नेमतें उन लोगों के लिए हैं जो उसके हुक्मों पर चलें और उसके रसूलों की पैरवी करें। यह दुनियावी सुख-चैन कितना ही बड़ा क्यों न हो, आख़िरत के सामने बहुत थोड़ा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हमें उस जन्नत में जगह मिले जहाँ के बाग़ और चश्मे कभी ख़त्म नहीं होंगे, और जहाँ का सुख हमेशा रहने वाला है।
📜 आयत 145-149 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 147
सूरा अश-शुआरा आयत 147 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बाग़ और चश्में और खेतिया और छुहारे जिनकी कलियाँ लतीफ़…सूरा आयत 147/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 145–149. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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