अश-शुआरा · 15/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسْتَمِعُونَ ۝١٥
Qaala kallaa fazhabaa bi Aayaatinaaa innaa ma`akum mustami`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो मैं डरता हूँ कि (शायद) मुझे ये लाग मार डालें ख़ुदा ने कहा हरगिज़ नहीं अच्छा तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ हम तुम्हारे साथ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं होगा (डर को दूर करने के लिए)
  • بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों (मोजिज़ों) के साथ
  • مُسْتَمِعُونَ: सुनने वाले (हम तुम्हारे साथ हैं, सब कुछ सुन रहे हैं)

तफ़सीर:

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह से डर का इज़हार किया कि फ़िरऔन उन्हें क़त्ल कर देगा, और अपने भाई हारून (अलैहिस्सलाम) को साथी बनाने की दुआ की, तो अल्लाह तआला ने उन्हें जवाब दिया: "हरगिज़ नहीं! ऐसा हरगिज़ नहीं होगा कि वे तुम्हें क़त्ल कर सकें।" यह अल्लाह की तरफ से एक पुख़्ता वादा और तसल्ली थी, जिसने मूसा (अलैहिस्सलाम) के दिल से ख़ौफ़ को जड़ से ख़त्म कर दिया।

अल्लाह ने फ़रमाया: "तुम दोनों (मूसा और हारून) मेरी निशानियों (मोजिज़ों) के साथ फ़िरऔन के पास जाओ।" ये निशानियाँ वही मोजिज़े थे — असा (लाठी) का साँप बनना, यद-ए-बैज़ा (हाथ का चमकना), और दूसरे दलीलें — जो उनकी सच्चाई को साबित करने के लिए काफ़ी थीं। अल्लाह ने यह भी फ़रमाया: "हम तुम्हारे साथ हैं, सब कुछ सुन रहे हैं।" यानी हम तुम्हारी हिफ़ाज़त कर रहे हैं, तुम्हारी मदद के लिए मौजूद हैं, और फ़िरऔन की हर बात, हर चाल और हर साज़िश को सुन रहे हैं। हमें उसकी कोई बात नहीं छिपी है, और हम अपने वादे के मुताबिक तुम्हें नस्र (मदद) और ग़लबा (विजय) अता करेंगे।

इस आयत में मोमिनीन के लिए एक बहुत बड़ी सीख और खुशखबरी है। जब अल्लाह किसी काम का हुक्म देता है, तो वह अपने बंदों के साथ अपनी मदद और हिफ़ाज़त का वादा भी करता है। अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें यक़ीन दिलाया कि हम तुम्हारे साथ हैं। यही हाल इस उम्मत का है — जब कोई बंदा अल्लाह के दीन की ख़िदमत के लिए निकलता है, तो अल्लाह उसके साथ होता है, उसकी हिफ़ाज़त करता है, और उसे कामयाबी देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा रखें, उसके वादों पर यक़ीन करें, और उसके दीन की तरफ बुलाने में किसी ताक़त से न डरें। अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ हमेशा होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो। यही वह यक़ीन है जो दिल को सुकून देता है और इंसान को हिम्मत और जुन्नत से भर देता है।



📜 आयत 13-17 — अश-शुआरा

13وَيَضِيقُ صَدْرِي وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِي فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَارُونَ
और (उनके झुठलाने से) मेरा दम रुक जाए और मेरी ज़बान (अच्छी तरह) न चले तो हारुन के पास पैग़ाम भेज दे (कि मेरा साथ दे)
14وَلَهُمْ عَلَيَّ ذَنبٌ فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ
(और इसके अलावा) उनका मेरे सर एक जुर्म भी है (कि मैने एक शख्स को मार डाला था)
15قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسْتَمِعُونَ
तो मैं डरता हूँ कि (शायद) मुझे ये लाग मार डालें ख़ुदा ने कहा हरगिज़ नहीं अच्छा तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ हम तुम्हारे साथ हैं
16فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَا إِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और (सारी गुफ्तगू) अच्छी तरह सुनते हैं ग़रज़ तुम दोनों फिरऔन के पास जाओ और कह दो कि हम सारे जहाँन के परवरदिगार के रसूल हैं (और पैग़ाम लाएँ हैं)
17أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ
कि आप बनी इसराइल को हमारे साथ भेज दीजिए
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अनुवाद — अश-शुआरा 15

सूरा अश-शुआरा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो मैं डरता हूँ कि (शायद) मुझे ये लाग मार…

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Tuesday, August 18, 2026

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