अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- तमस्सूहा – उसे छुओ या उसे नुकसान पहुँचाओ
- बिसू' – बुराई, नुकसान, तकलीफ़ (जैसे मारना, ज़ख्मी करना, या वध करना)
- अज़ाब – यातना, दंड
- यौमिन अज़ीम – बड़े (भयानक) दिन की यातना
तफ़सीर:
हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को समझाया कि यह अल्लाह की भेजी हुई नाक़ा (ऊँटनी) है। यह अल्लाह का एक चमत्कार और निशानी है। उन्होंने साफ़ हिदायत दी कि इस नाक़ा के साथ किसी भी तरह की बुराई न करना — न उसे मारना, न उसे ज़ख्मी करना, न उसे सताना, न उसे उसके पानी के हिस्से से रोकना। अगर तुमने ऐसा किया, तो अल्लाह का अज़ाब तुम्हें अपनी लपेट में ले लेगा — ऐसे दिन का अज़ाब जो बहुत ही भयानक और सख्त होगा, जिसकी हिफ़्ज़त और शिद्दत की कोई इंतिहा नहीं।
यह चेतावनी सिर्फ़ उस वक़्त की क़ौम के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए सबक़ है जो अल्लाह की निशानियों के साथ बुराई करता है। अल्लाह की हर निशानी — चाहे वह कोई जानवर हो, कोई इंसान हो, कोई रिज़्क़ हो, या कोई और नेमत — उसके साथ अच्छा बर्ताव करना चाहिए। अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करना और उन्हें नुकसान न पहुँचाना ही ईमान की निशानी है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की हर चीज़ का एहतराम करना चाहिए। जो लोग अल्लाह की निशानियों का मज़ाक़ उड़ाते हैं या उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं, वे अल्लाह के ग़ज़ब के हक़दार बनते हैं। लेकिन जो लोग अल्लाह की निशानियों का सम्मान करते हैं और उनके साथ भलाई करते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और बरकतें हैं।
याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। वह देर करता है, लेकिन भूलता नहीं। जब उसका अज़ाब आता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के हुक्मों का पालन करना चाहिए और उसकी निशानियों के साथ अच्छा सुलूक करना चाहिए। यही हमारी कामयाबी और नजात का ज़रिया है।
📜 आयत 154-158 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 156
सूरा अश-शुआरा आयत 156 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसको कोई तकलीफ़ न पहुँचाना वरना एक बड़े (सख्त)…सूरा आयत 156/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 154–158. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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