अश-शुआरा · 209/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ ۝٢٠٩
Zikraa wa maa kunnaa zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और हम ज़ालिम नहीं है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ذِكْرَى: नसीहत, याद दिलाना, चेतावनी
  • ظَالِمِين: अत्याचारी, ज़ालिम

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि उसने किसी भी बस्ती को उसके अत्याचारों के कारण विनष्ट नहीं किया, मगर यह कि पहले उनके पास रसूल भेजे, जो उन्हें सचेत करते और अल्लाह के अज़ाब से डराते थे। यह सचेत करना और डराना उनके लिए नसीहत और याद दिलाने का ज़रिया था, ताकि वे अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ और सीधे रास्ते पर आ जाएँ।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "और हम ज़ालिम नहीं थे" — यानी हमने किसी पर ज़ुल्म नहीं किया। हम किसी क़ौम को तब तक अज़ाब में नहीं पकड़ते, जब तक उनके पास हुज्जत (प्रमाण) क़ायम न कर दें और रसूल भेजकर उन्हें सचेत न कर दें। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायपूर्णता है कि वह बिना चेतावनी के किसी को दंडित नहीं करता।

यह आयत हमें अल्लाह की रहमत और अदल (न्याय) की याद दिलाती है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर क़ौम को मौका देता है कि वह सीधे रास्ते पर आ जाए। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है कि हमारा रब न्यायप्रिय और दयालु है। वह हमें मौका देता है, हमारी ग़लतियों पर फ़ौरन पकड़ नहीं करता, बल्कि रसूलों और किताबों के ज़रिए हमें राह दिखाता है।

इससे हमें सबक लेना चाहिए कि हम अल्लाह के भेजे हुए मार्गदर्शन को क़बूल करें, उसकी नसीहतों से फ़ायदा उठाएँ और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक ढालें। अल्लाह ने हम पर अपनी रहमत से क़ुरआन और रसूल ﷺ भेजे — यह हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें और अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 207-211 — अश-शुआरा

207مَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يُمَتَّعُونَ
तो जिन चीज़ों से ये लोग चैन किया करते थे कुछ भी काम न आएँगी
208وَمَا أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
और हमने किसी बस्ती को बग़ैर उसके हलाक़ नहीं किया कि उसके समझाने को (पहले से) डराने वाले (पैग़म्बर भेज दिए) थे
209ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ
और हम ज़ालिम नहीं है
210وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ
और इस क़ुरान को शयातीन लेकर नाज़िल नही हुए
211وَمَا يَنبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ
और ये काम न तो उनके लिए मुनासिब था और न वह कर सकते थे
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अनुवाद — अश-शुआरा 209

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Tuesday, August 18, 2026

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