अश-शुआरा · 210/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ ۝٢١٠
Wa maa tanazzalat bihish Shayaateen
📖 हिंदी अर्थ
और इस क़ुरान को शयातीन लेकर नाज़िल नही हुए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنَزَّلَتْ: उतरना, अवतरित होना।
  • الشَّيَاطِين: शैतान, (यहाँ अभिप्राय: जिन्नात में से सरकश और बुरे प्राणी)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) के झूठे दावे का खंडन करती है जो कहते थे कि यह क़ुरआन मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर शैतानों द्वारा उतारा गया है। अल्लाह तआला इस आयत में स्पष्ट रूप से बताता है कि यह क़ुरआन शैतानों के साथ नहीं उतरा, और न ही उनके लिए यह संभव है। क्योंकि शैतान आसमान से क़ुरआन सुनने से पूरी तरह रोके गए हैं; उन्हें उल्कापिंडों (शहाबों) से मार भगाया जाता है, ताकि वे अल्लाह के कलाम को सुनकर उसे लोगों तक न पहुँचा सकें। यह क़ुरआन तो अल्लाह की ओर से उसके अमीन (भरोसेमंद) फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के माध्यम से पैग़म्बर के पवित्र हृदय पर उतरा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन एक ऐसी पवित्र किताब है जो हर प्रकार की बुराई और शैतानी प्रभाव से पाक है। जो लोग इस पर आरोप लगाते हैं, वे वास्तव में अल्लाह के स्पष्ट सत्य को झुठलाते हैं। एक मुसलमान के रूप में हमें इस बात पर गहरा यक़ीन रखना चाहिए कि क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, जो हिदायत, रहमत और नूर (प्रकाश) से भरा है। यह हमारे लिए जीवन का पूरा मार्गदर्शन है, और जो कोई इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह ने इस किताब को हमारे लिए आसान बनाया है, ताकि हम इसे समझें, इस पर अमल करें और इसके माध्यम से दुनिया और आख़िरत की सफलता प्राप्त करें। हमें चाहिए कि इस किताब की तिलावत (पढ़ने) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ, इसके अर्थों पर चिंतन करें और इसके आदेशों को अपने जीवन में लागू करें। यही हमारी सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 208-212 — अश-शुआरा

208وَمَا أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
और हमने किसी बस्ती को बग़ैर उसके हलाक़ नहीं किया कि उसके समझाने को (पहले से) डराने वाले (पैग़म्बर भेज दिए) थे
209ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ
और हम ज़ालिम नहीं है
210وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ
और इस क़ुरान को शयातीन लेकर नाज़िल नही हुए
211وَمَا يَنبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ
और ये काम न तो उनके लिए मुनासिब था और न वह कर सकते थे
212إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ
बल्कि वह तो (वही के) सुनने से महरुम हैं
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अनुवाद — अश-शुआरा 210

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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