अश-शुआरा · 226/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ ۝٢٢٦
Wa annahum yaqooloona ma laa yaf`aloon
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग ऐसी बाते कहते हैं जो कभी करते नहीं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ: अर्थात वे ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं — यानी झूठ बोलते हैं, बड़ाई और दिखावे की बातें करते हैं जो उनके अमल (कर्म) से मेल नहीं खातीं।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला शायरों (कवियों) की एक और बुरी आदत का ज़िक्र कर रहे हैं — कि वे ऐसी बातें कहते हैं जो वे स्वयं नहीं करते। यानी वे दूसरों की बड़ाई में मुबालग़ा (अतिशयोक्ति) करते हैं, झूठी तारीफ़ें करते हैं, और अपने क़ौल (बोल) और फ़ेल (कर्म) में विरोधाभास रखते हैं। वे कहते हैं: "हमने यह किया, हमने वह किया" — हालाँकि उन्होंने कुछ किया नहीं होता। वे सच्चाई को छोड़कर झूठ और दिखावे की दुनिया में जीते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मुसलमान वही है जो अपनी ज़ुबान और अपने अमल में एक जैसा हो। इस्लाम में सबसे बड़ी नेकी यह है कि इंसान जो कहे वही करे, और जो करे वही कहे। रसूलुल्लाह ﷺ की सीरत इसी पर थी — आप ﷺ जो कहते थे, पहले खुद उस पर अमल करते थे। अल्लाह तआला ने ईमानवालों की तारीफ़ में फ़रमाया: "ऐ ईमानवालों! तुम वह बात क्यों कहते हो जो करते नहीं?" (सफ़: 2) — यानी कहने और करने में समानता ही ईमान की निशानी है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि शायरों का जो हाल था — वे झूठ, फ़रेब और बेहूदा बातों में मशग़ूल रहते थे — उसके मुक़ाबले में अल्लाह ने पैग़म्बरों और नेक बंदों की तारीफ़ की है जो सच बोलते हैं और सच पर अमल करते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को झूठ से बचाएँ, वादों को पूरा करें, और अपने दावों को अपने अमल से साबित करें। यही वह रास्ता है जो अल्लाह की मुहब्बत और क़ुरआन की हिदायत की तरफ़ ले जाता है।

याद रखें — अल्लाह तआला सच्चे और सीधे लोगों से मुहब्बत करता है। जो इंसान अपनी ज़ुबान को सच्चाई पर क़ायम रखता है और अपने कर्मों को अपनी बातों के मुताबिक़ बनाता है, वही अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़तवाला है। आइए हम अपनी ज़िंदगी में इस सच्चाई को अपनाएँ — कहें तो वही जो करें, और करें तो वही जो कहें — ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिनके बारे में अल्लाह ने फ़रमाया: "वे कहते हैं और करते भी हैं।"



📜 आयत 224-227 — अश-शुआरा

224وَالشُّعَرَاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُونَ
हालाँकि उनमें के अक्सर तो (बिल्कुल) झूठे हैं और शायरों की पैरवी तो गुमराह लोग किया करते हैं
225أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِي كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ
क्या तुम नहीं देखते कि ये लोग जंगल जंगल सरगिरदॉ मारे मारे फिरते हैं
226وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ
और ये लोग ऐसी बाते कहते हैं जो कभी करते नहीं
227إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَذَكَرُوا اللَّهَ كَثِيرًا وَانتَصَرُوا مِن بَعْدِ مَا ظُلِمُوا ۗ وَسَيَعْلَمُ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَيَّ مُنقَلَبٍ يَنقَلِبُونَ
मगर (हाँ) जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए और क़सरत से ख़ुदा का ज़िक्र किया करते हैं और जब उन पर ज़ुल्म किया जा चुका उसके बाद उन्होंनें बदला लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि वह किस जगह लौटाए जाएँगें
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
226आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 226

सूरा अश-शुआरा आयत 226 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग ऐसी बाते कहते हैं जो कभी करते…

सूरा आयत 226/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 224–227. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए