अश-शुआरा · 60/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ ۝٦٠
Fa atba`oohum mushriqeen
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ (मूसा) तो रात ही को चले गए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَتْبَعُوهُم: उन्होंने (फ़िरऔन और उसकी सेना ने) उनका (मूसा और उनके साथियों का) पीछा किया, यानी उनके पीछे चल पड़े।
  • مُشْرِقِينَ: सूर्योदय के समय, जब सूरज निकलता है और उसकी रोशनी फैलती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे रातों-रात अपनी क़ौम (बनी इसराईल) को लेकर मिस्र से निकल जाएँ, तो फ़िरऔन और उसके लश्कर को यह ख़बर हुई। उन्होंने सुबह सूरज निकलते ही बनी इसराईल का पीछा किया और उनके पीछे-पीछे चल पड़े। यह वही समय था जब सूरज की किरणें पूर्व दिशा से फूट रही थीं और रोशनी पूरे मैदान में फैल चुकी थी। फ़िरऔन और उसकी सेना ने इस कदर तेज़ी से पीछा किया कि वे मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों के बहुत करीब पहुँच गए।

यहाँ अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि फ़िरऔन का ज़ुल्म और सरकशी किस हद तक पहुँच चुकी थी। उसने अल्लाह के नबी और उनकी क़ौम का पीछा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, यहाँ तक कि सूरज निकलते ही वे उनके पीछे दौड़ पड़े। लेकिन इसी जगह से अल्लाह की क़ुदरत के नज़ारे शुरू होते हैं, जहाँ मोमिनों को सब्र और भरोसे का फल मिलता है और ज़ालिमों को अपनी सज़ा का सामना करना पड़ता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह के बंदे उसकी राह में निकलते हैं, तो दुश्मन चाहे कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की मदद उनके साथ होती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी अल्लाह के हुक्म पर चल रहे थे, और फ़िरऔन अपनी सरकशी में था। अल्लाह ने आगे चलकर दिखाया कि सच्चाई और ईमान ही जीतता है, चाहे ज़ालिम कितनी भी कोशिश कर ले। यह हर उस इंसान के लिए एक पैग़ाम है जो अल्लाह की राह में मुश्किलों का सामना करता है — कि अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, और वह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

🎧 सुनें

📜 आयत 58-62 — अश-शुआरा

58وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
ग़रज़ हमने इन लोगों को (मिस्र के) बाग़ों और चश्मों और खज़ानों और इज्ज़त की जगह से (यूँ) निकाल बाहर किया
59كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَاهَا بَنِي إِسْرَائِيلَ
(और जो नाफरमानी करे) इसी तरह सज़ा होगी और आख़िर हमने उन्हीं चीज़ों का मालिक बनी इसराइल को बनाया
60فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ
ग़रज़ (मूसा) तो रात ही को चले गए
61فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ
और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे
62قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है
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अनुवाद — अश-शुआरा 60

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Tuesday, August 18, 2026

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