Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَاللَّهِ: अल्लाह की क़सम! (यह क़सम का शब्द है, जिसका अर्थ है "अल्लाह की क़सम")।
- إِن كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ: हम तो यक़ीनन स्पष्ट गुमराही में थे। "मुबीन" का अर्थ है खुली, साफ़ और ज़ाहिर गुमराही।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जब जहन्नम (नरक) में मूर्तियों की पूजा करने वाले और उनकी पूजा करवाने वाले आपस में झगड़ रहे होंगे। उस वक़्त पूजा करने वाले लोग उन लोगों से (जिन्हें वे दुनिया में पूजते थे, या जिन्होंने उन्हें गुमराह किया था) कहेंगे: "अल्लाह की क़सम! हम तो दुनिया में साफ़ और खुली गुमराही में थे।" वे इस बात का इक़रार करेंगे कि हमने तुम्हें रब्बुल आलमीन (सारे जहानों के पालनहार) के बराबर ठहराया, जबकि सच्चाई यह थी कि इबादत (पूजा) के योग्य सिर्फ़ अल्लाह ही है। यह उनका अपनी गलती का इक़रार होगा, लेकिन यह इक़रार उस वक़्त किसी काम नहीं आएगा, क्योंकि दुनिया का इम्तिहान ख़त्म हो चुका होगा।
इस आयत का सबक़ यह है कि इंसान को चाहिए कि वह दुनिया में ही अपनी गलतियों को पहचाने और अल्लाह की तरफ़ लौट आए। जो लोग दुनिया में सच्चाई को नहीं पहचानते, वे आख़िरत (क़यामत के दिन) पछताएँगे, लेकिन उस दिन पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपनी ज़िंदगी में सीधे रास्ते (इस्लाम) पर चलें, अल्लाह की इबादत करें और उसके साथ किसी को शरीक न करें। अल्लाह ही वह है जिसने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ (रोज़ी) दी और हमें सही रास्ता दिखाने के लिए नबी और किताबें भेजीं। इसलिए हमें उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अगर हमसे कोई गलती हो जाए, तो हमें दुनिया में ही तौबा (पश्चाताप) कर लेना चाहिए, क्योंकि आख़िरत का पछतावा बेकार है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमा करने वाला है, वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है।
📜 आयत 95-99 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 97
सूरा अश-शुआरा आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में…सूरा आयत 97/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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